8. भारतीय वित्त विधेयक - Page 70

भारतीय वित्त विधेयक

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हो सकता। यहां तक कि शत्रु फर्मों की सूची, पेटेंटों आदि के मामले में भी साक्ष्य अधिनियम के अनुसार सरकारी गजट ही ऐसा महत्वपूर्ण साक्ष्य है जिनके आधार पर कुछ बातें साबित की जा सकती हैं। अतः मैं सर फ्रेड्रिक जेम्स से आग्रह करूंगा कि चाहे वे हमसे सहमत हों या नहीं, सरकारी कागज के बारे में हम कुछ भी करें परंतु गजट को हमें इस विवाद में लाना नहीं चाहिए।

सर फ्रेड्रिक जेम्सः मैं बताना चाहूंगा कि मेरी मांग यह थी कि इस बात की तहकीकात की जानी चाहिए कि क्या ऐसी मदों को जो निस्संदेह महत्वहीन हैं और केंद्रीय सरकार के गजट में प्रकाशित हुई है, सभी प्रादेशिक गजटों में प्रकाशित करना आवश्यक था।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः इसका स्पष्ट कारण यह है कि प्रत्येक प्रादेशिक सरकार को अपने प्रांतीय गजट उस रूप में प्रकाशित करने होते हैं जैसा भारत सरकार अधिनियम द्वारा विहित किया गया है। परंतु मैं ऐसी बातों का सहारा नहीं लेना चाहता जिन्हें माननीय मित्र के तर्क को काटने के लिए वाग्मिता भरा प्रति-उत्तर कहा जाए। भारत सरकार ने कागज के अपव्यय को नियंत्रित करने के लिए जो व्यावहारिक कदम उठाए हैं, मैं उनका उल्लेख करना चाहूंगा। सर्वप्रथम, मैं गजट के प्रश्न को लूंगा। मैं अपने सम्मानित मित्र सर फ्रेड्रिक जेम्स और सदन के अन्य सदस्यों से जो इस प्रश्न में दिलचस्पी रखते हों, अनुरोध करूंगा कि वे 29 अगस्त के भारत के गजट भाग-2, खंड-1 का मिलान 6 मार्च, 1943 के बजट भाग-2, खंड-1 से करें। अगर यह सदन और इसके सम्मानित सदस्य गजट के इन दो अंकों का मिलान करने का कष्ट करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि गजट के डेढ़ पृष्ठ में जितनी बातें छपती थीं, उन्हें अब आधे स्तम्भ में समाहित कर लिया गया है। और इस प्रकार स्थान के अपव्यय को रोका गया है। सारे पार्श्ववर्ती अंश हटा दिए गए हैं।

डॉ. पी. एन. बनर्जी (कलकत्ता उपनगरः गैर-मुस्लिम शहरी)ः क्षीण दृष्टि वाले व्यक्ति का क्या होगा?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं हरेक को प्रसन्न नहीं रख सकता। लेकिन सर फ्रेड्रिक जेम्स ने जो प्रश्न उठाए हैं उनके संबंध में मैं उन्हें यह सूचित कर दूं कि भारत सरकार ने सभी प्रांतीय सरकारों से कहा है कि क्या ऐसा करना उचित और संभव नहीं होगा कि वे भारत सरकार द्वारा भारत के गजट में की गई अधिसूचनाओं का ही उपयोग करें और अपने गजट में अपने उपयोग के लिए पुनः प्रकाशित करने के व्यय से बचें रहें। निश्चय ही हम इतना ही कर सकते हैं कि उन्हें सलाह दें और सिफारिश करें।