8. भारतीय वित्त विधेयक - Page 72

भारतीय वित्त विधेयक

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में दिए गए विशिष्ट सुझाव पर आता हूं। उनका विशिष्ट सुझाव, यदि मैं सही-सही समझ पाया हूं तो यह है कि इंग्लैंड में एक निकाय नियुक्त किया गया था, अर्थात एक समिति जिसके सदस्य थे चार्टर्ड एकाउंटेंट, प्रकाशन गृह का एक प्रतिनिधि और मुद्रण स्थापना का एक प्रतिनिधि। उन्होंने उस रीति और तरीके का जिसमें उक्त समिति अपना कार्य करती है कोई ब्यौरा हमें नहीं दिया है और न उन्होंने ऐसे किसी सिद्धांत का उल्लेख किया है जिसका अनुपालन उक्त समिति मितव्ययिता लाने के लिए करती है। अतः अभी इस अवस्था में मेरे लिए यह कहना बिल्कुल संभव नहीं है कि मैं उनके द्वारा दिए गए सुझावों को मनाने को तैयार हूं। परंतु मैं उनको यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि हमारे द्वारा उठाए गए कदम न्यूनाधिक, वे भी मानेंगे, उनके द्वारा सुझाए गए रास्ते के आस-पास ही हैं। हमने जो कदम उठाए हैं वे हैं नियंत्रक मुद्रण को सलाह देने के लिए कमर्शियल मास्टर पिं्रटर नामक अधिकारी का नियुक्त किया जाना। हमने हाल ही में वित्त विभाग से इसकी स्वीकृति प्राप्त कर ली है और शीघ्र ही ऐसे अधिकारी को नियुक्त करेंगे। मेरा विश्वास है कि यह अधिकारी वह कार्य कर सकेगा जो इंग्लैंड की उक्त समिति है।

डॉ. पी. एन. बनर्जीः वह भारतीय है या यूरोपीय मूल का?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः हमें अभी वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है।

श्री जमनादास एम. मेहताः (बंबई मध्य डिविजनः गैर-मुस्लिम ग्रामीण)ः क्या इससे उन पर आने वाली लागत की अपेक्षा बचत अधिक होगी?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः हमें ऐसी आशा करनी चाहिए। अनुमान लगाने और आशा करने में कोई हानि नहीं है। बस कागज के प्रश्न के संबंध में मुझे इतना ही कहना है।

सर फ्रेड्रिक जेम्स द्वारा उठाया गया दूसरा प्रश्न अधिकारियों के परिवारों के लिए शिमला में आवासीय व्यवस्था मुहैया की जाने के संबंध में है। वे इस बात की सराहना करेंगे कि जहां तक आवासीय व्यवस्था का संबंध है, भारत सरकार इस विषय में अपने आपको बहुत ही निराशाजनक स्थिति में पाती है। सरकार के पास जितनी आवास व्यवस्था थी और जितनी आवासीय क्षमता वह आवास ग्रहण करने के आदेश के परिणामस्वरूप एकत्र कर सकी है वह ऐसे अधिकारों की संख्या की तुलना में कुछ नहीं हैं जिन्हें युद्ध की तैयारी के फलस्वरूप भारत सरकार को नियोजित करना है। वह इस बात से भी सहमत होंगे कि यदि हमें युद्ध की तैयारियां पूर्ण रूप से करनी है तो हमें आवास गृहों की प्राथमिकता निश्चित करनी होगी, और जहां तक प्राथमिकता का प्रश्न है स्वयं अधिकारियों की तुलना में उनके परिवारों को वरीयता नहीं दी जाएगी। साथ ही, भारत सरकार यह भी जानती है कि पति-पत्नी और पिता-पुत्र का अलगाव