9. श्रम विभाग की स्थायी समिति के लिए सदस्यों का निर्वाचन - Page 75

50 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

की संख्या तीन से कहीं अधिक है। मैंने सुना है कि इस समिति की बैठक बहुधा नहीं होती है। मुझे नहीं मालूम की यह कितना सही है, परंतु यदि इसकी बैठक होती भी है तो इस समिति के सामने अधिक कार्य नहीं होते। यदि बात सचमुच ऐसी है, तो मुझे डर है कि इस प्रकार की समिति की उपयोगिता बहुत घट जाएगी। इसीलिए मैं सरकार से अनुरोध करूंगा की वह सदस्यों की संख्या बढ़ाकर आठ कर दे। मैं समझता हूं कि दो सदस्यों का चयन अन्य स्थान से किया जाता है। मेरा सुझाव है कि आठों सदस्य इस सदन द्वारा निर्वाचित किए जाएं। यदि आप चाहें तो अन्य सदन को दिए गए सदस्यों की संख्या में वृद्धि कर सकते हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मुझे बड़ी प्रसन्नता है कि मेरे प्रस्ताव पर सदन ने इतनी दिलचस्पी दिखाई है। तीन की संख्या मैं समझता हूं न तो समिति के महत्व पर आधारित है और न ही किसी अन्य कारण से इसे निर्धारित किया गया है। परंतु मैंने सुना है कि यह एक मानक संख्या है और यदि इसमें कोई बढ़ोतरी की जाती है या मानक संख्या से हटकर कोई संख्या निर्धारित की जाती है तो यह एक अपवाद होगा न कि नियम।

महोदय, मेरे माननीय मित्र डॉ. बनर्जी द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर कि यह संख्या तीन पर सीमित इसलिए है कि विभाग इस समिति के प्रति बहुत कम सौजन्यता बरतता है। मेरा नम्र निवेदन है कि यह तथ्य पर आधारित सत्य नहीं है। जो मैं कह रहा हूं उससे सदन को पता चलेगा कि सन 1940 में इस समिति की दो बैठकें हुई थीं जिनमें समिति के समक्ष कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण मामले रखे गए थे। उदाहरणास्वरूप सन 1940 में बुलाई गई दो बैठकों में समिति के समक्ष रखे गए विचारणीय विषय थे - श्रम सम्मेलन का निष्कर्ष, तकनीकी प्रशिक्षण, जांच समिति की रिपोर्ट, कुशल कारीगरों के प्रशिक्षण की स्कीम और दिल्ली में उनके रहने की व्यवस्था आदि। सन 1941 में एक बैठक हुई जिसमें समिति के समक्ष प्रस्तुत किए गए विषयों में श्रम मंत्रियों के दूसरे सम्मेलन के निष्कर्ष और बेविन प्रशिक्षण स्कीम के अधीन तकनीकी प्रशिक्षण की प्रगति भी सम्मिलित थी। सन् 1942 में एक बैठक हुई थी और उसके तुरंत बाद भी एक बैठक हुई थी जिसे स्थगित कर दिया गया था। श्रम मंत्रियों के तीसरे सम्मेलन की कार्यवाही कुछ विषयों पर नियोजकों और श्रमिकों के प्रतिनिधियों के विचारों का सार संक्षेप, दिल्ली और शिमला में भवन-निर्माण कार्यक्रम, ट ्र ेड यूनियनों की मान्यता संबंधी प्रस्ताव, बेविन प्रशिक्षण स्कीम के अंतर्गत तकनीकी प्रशिक्षण में की गई प्रगति और राष्ट ्र ीय सेवा (तकनीकी कार्मिक) अध्यादेश, 1940 में संशोधन आदि विषय समिति की बैठक में प्रस्तुत किए गए थे। मेरा विश्वास है कि यह कोई नहीं कह सकता कि यह विभाग समिति के समक्ष ऐसी बातें नहीं रखता जो कि महत्वपूर्ण और श्रमिकों के हित की हैं।