श्रम विभाग की स्थायी समिति के लिए सदस्यों का निर्वाचन
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अब तो दूसरी बात मैं सदन के सम्मुख पेश करना चाहूंगा वह यह है कि श्रम विभाग को परामर्श देने वाली समिति एक यही नहीं है। इसके अतिरिक्त हमने अब एक पूर्ण सम्मेलन की स्थापना की है, जिसमें केंद्रीय व प्रांतीय सरकारों के प्रतिनिधि, भारतीय राज्यों के प्रतिनिधि, नियोजकों और श्रमिकों के प्रतिनिधि सम्मिलित हैं और जो बड़े पैमाने पर सम्मेलन में भाग लेते हैं। माननीय डॉ. बनर्जी द्वारा सुझाई गई इतनी बड़ी वृद्धि की जरूरत नहीं है। इसके अतिरिक्त, हमारे यहां एक स्थायी श्रम सलाहकार समिति भी है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, मेरा विचार है कि समिति में सदस्यों की संख्या बढ़ाने का यदि कोई मामला बनता भी था तो वह पूर्ण सम्मेलन के गठन के कारण और स्थायी श्रम समिति के कारण अब दब गया है। फिर भी, यदि मेरे माननीय मित्र का ऐसा सोचना है कि समिति के सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाए तो मैं यह संख्या आठ तक बढ़ाने को तैयार हूं - इसमें से पांच सदस्य इस सदन के होंगे और तीन ऊपरले सदन के। मैं आशा करता हूं कि इस सदन के मेरे माननीय मित्रगण इससे संतुष्ट होंगे।
श्री एच. आर. साथर एच. एसाक सेट (पश्चिमी घाट और नीलगिरिः मुस्लिम)ः क्या माननीय सदस्य यह बताएंगे कि इस समिति के सदस्य पूर्ण सम्मेलन के सदस्य हैं या नहीं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः उनमें से कुछ जैसे श्री मेहता और श्री जोशी, इस सम्मेलन और स्थायी समिति दोनों के सदस्य हैं।
श्री एच. आर. साथर एच. एसाक सेटः क्या वे पूर्ण सम्मेलन के पदेन सदस्य हैं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः नहीं, वे अपने-अपने संगठनों के प्रतिनिधि हैं।
मौलवी मोहम्मद अब्दुल गनी (तिरहुत डिवीजनः मुस्लिम)ः महोदय, युद्ध की स्थिति देखते हुए, इस श्रम समिति का होना परमावश्यक हो गया है। यह श्रमिक समस्याओं का समाधन करती है। इसके अतिरक्त यह समिति, जैसा कि मेरे माननीय प्रभारी सदस्य ने कहा है, अनेक अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विचार भी करती है जैसे भवन-निर्माण संबंधी बातें.................।
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः माननीय श्रम सदस्य ने अभी-अभी यह बात कही है।
प्रश्न हैः
‘‘कि यह सभा ऐसी रीति से जो माननीय अध्यक्ष निर्दिष्ट करें स्थायी समिति में कार्य करने के लिए तीन गैर-सरकारी सदस्य निर्वाचित करें, जो उन विषयों पर जिनसे श्रम विभाग संबंधित है, सलाह दें’’
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।