10
ऽभारतीय चाय नियंत्रण (संशोधन) विधेयक
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः महोदय, अपने माननीय मित्र श्री जोशी की टिप्पणी को ध्यान में रखते हुए, मुझे यह उचित जान पड़ता है कि मैं उनके द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करूं। एक तरह से श्री जोशी की टिप्पणी असंगत प्रतीत होती है। हम चाय नियंत्रण अधिनियम पर चर्चा कर रहे हैं और प्रत्यक्षतः यहां श्रमिकों की स्थिति की चर्चा करना पूर्ण रूप से अप्रासंगिक होगा। किन्तु इस प्रश्न से एक व्यापक दृष्टिकोण से देखते हुए यह स्वीकार करना होगा कि जब राज्य से यह कहा जा रहा है कि मांग पूर्ति के सिद्धांत को लागू करने से किसी उद्योग पर लंबित रखा जाए, तब यह उचित ही है कि ऐसे लोग जो श्रमिकों में अभिरुचि रखते हैं यह कहें कि उनके हितों की रक्षा की जाए। और यह मैं इस दृष्टिकोण से कह रहा हूं कि इस बिंदु पर सरकार की ओर से उत्तर आना आवश्यक है।
महोदय, पहली बात तो श्री जोशी ने कही है वह यह है कि श्रम संबंधी रॉयल कमीशन की रिपोर्ट को आए बारह वर्ष से अधिक गुजर चुके हैं और भारत सरकार ने आयोग की सिफारिशों के संबंध में व्यावहारिक रूप से कुछ भी नहीं किया है। मैं इस बात से सहमत हूं कि किसी सरकार के लिए ऐसे रॉयल कमीशन की, जिसे इस विषय की जांच के लिए नियुक्त किया गया था, सिफारिशों को कार्यान्वित करने के लिए बारह वर्ष का समय एक लंबी अवधि है। परंतु मैं समझता हूं कि उन तथ्यों के पेशेनजर जो मैं अपनी संक्षिप्त टिप्पणी में कहना चाहता हूं कि श्री जोशी और यह सदन इस बात को महसूस करेंगे कि भारत सरकार के माथे बहुत गंभीर दोषारोपण नहीं किया जाना चाहिए। जैसा कि माननीय सदस्य को याद होगा श्रम विषेयक रॉयल कमीशन ने पांच सिफारिशें, चाय बागानों के संबंध में की थी। पहली सिफारिश यह थी कि असम श्रमिक उत्प्रवासी अधिनियम निरसित किया जाए और ऐसा अधि नियम पारित किया जाए जिसमें श्रमिक के लिए इससे अधिक सुविधाएं दी गई हों। दूसरी सिफारिश श्रमिकों के पारिश्रमिक नियत करने के लिए मजदूरी बोर्ड स्थापित
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) खंड 23, मार्च, 1943, पृष्ठ 1370-73