10. भारतीय चाय नियंत्राण (संशोधन) विधेयक - Page 79

54 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मौलाना जफर अली खांः भारत सरकार ने इस विषय में कोई कदम नहीं उठाने के लिए असम सरकार से जवाबतलब क्यों नहीं किया?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः इस प्रश्न का जवाब उस समय के इस विभाग के प्रभारी माननीय सदस्य द्वारा दिया गया होगा। मैं तो कल ही आया हूं और मैं इस संबंध में अधिक जानकारी नहीं रखता। माननीय मित्र श्री जोशी ने जो प्रश्न उठाया है, हम तो उस पर विचार कर रहे हैं - कि सिफारिशों की शर्तों के संबंध में पूछताछ करने का समय आया है या नहीं। महोदय, मैं पाता हूं कि बात जब लगभग निर्णय की ओर बढ़ रही थी तब नई असम सरकार ने, जो कि कांग्रेस सरकार थी, इसमें उंगली डालना उचित समझा और एक संकल्प के द्वारा 23 मई, 1939को एक समिति का गठन किया। यह स्वाभाविक है कि असम सरकार द्वारा उठाए गए कदम के परिणामस्वरूप भारत सरकार अपना हाथ इस क्षेत्र से बहार खींच ले जिसको उसने स्थानीय सरकार को मूल पत्र की शर्तों के द्वारा सौंप दिया था। चूंकि मेरे मानवीय मित्र श्री जोशी ने यह प्रश्न उठाया है मैं यह कहने के लिए तो तैयार नहीं हूं कि वास्तविक कारण क्या था, परंतु ऐसा लगता है कि समिति सदस्यों के बीच कोई टकराव था और यह टकराव लगभग संघर्ष में बदल गया जिसके फलस्वरूप समिति के कार्य को निलंबित करना पड़ा अंततोगत्वा, असम सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की, बस उन्होंने इतना भर किया कि एक अधिसूचना यह बताते हुए जारी की कि क्या हुआ और किन कारणों से समिति को निलंबित करना पड़ा। 1 जुलाई, 1939 के अंत तक बातें यहां तक पहुंची कि अब इसके कुछ महीनों पश्चात ही युद्ध की घोषणा कर दी गई और अब किसी के लिए, चाहे वह स्थानीय सरकार हो या केंद्रीय सरकार हों, इस बात की जांच-पड़ताल प्रारंभ करना असंभव है। मेरा विश्वास है इन परिस्थितियों से श्री जोशी मानेंगे कि भारत सरकार वास्तव में अपनी ओर से किसी प्रकार की अकर्मण्यता के लिए उत्तरदायी नहीं है।

जहां तक मुख्य प्रश्न का सवाल है कि सरकार श्रमिकों के हित की सुरक्षा करने की आवश्यकता समझती हैं या नहीं, मैं सीधे यह कहते हुए जवाब दूंगा कि सरकार इस प्रश्न को सर्वोच्च महत्व का प्रश्न समझती है। मैं बागान में कार्यरत श्रमिकों की अवस्था के प्रश्न के भीतर नहीं जाना चाहता हूं। समाचार पत्रों से विभिन्न प्रकार के आंकड़े हमें सुनने में आते हैं, ये ब्यौरे श्रीलंका में दी जा रही मजदूरी और असम चाय बागान में दी जा रही मजदूरी के संबंध में होते हैं। मैं मजदूरी आदि संबंधी इन दोनों वर्गों के आंकड़ों को सरकार की ओर से पुष्टि करने के लिए तैयार नहीं हूं क्योंकि हमें सही-सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं जिसका कारण यह है कि इस विषय में अभी तक कोई अनुसंधान नहीं किया गया है। परंतु एक बात मैं कहूंगा कि चाय-बागानों में परिस्थितियों को विनियमित नहीं किया गया है और वे बड़े पैमाने