11. युद्ध आहत (मुआवजा बीमा) विधेयक - Page 82

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ऽयुद्ध आहत (मुआवजा बीमा) विधेयक

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूंः

‘‘कि युद्ध से आहत होने वाले कामगारों को मुआवजा देने का दायित्व नियोजकों

पर अधिरोपित करने और ऐसे दायित्व के लिए नियोजकों द्वारा बीमा कराने का

उपबंध करने वाला विधेयक एक प्रवर समिति को निर्दिष्ट किया जाए जिसके

सदस्य सर विठ्ठल एन. चन्द्रावरकर, श्री एन. एम. जोशी, श्री जमनादास एम.

मेहता, श्री डी. एस. जोशी, श्री हुसेनभाई ए. लाल जी, खान बहादुर मियां गुलाम

कादित मोहम्मद शमान, श्री सी.सी. मिलर, श्री ई. एल. सी. ग्विल्ट, मौलाना

जफर अली खान, श्री यूसुफ अब्दुल्ला हारून, हाजी चौधरी, मुहम्मद इस्माइल

खान, श्री एच.ए. साथर, एच. एसाक सेट, श्री अमरेन्द्र नाथ चट्टोपाध्याय, श्री

आर. आर. गुप्ता और प्रस्तावक होंगे और समिति की बैठक के लिए सदस्यों की

उपस्थिति की आवश्यक संख्या पांच होगी और समिति अपनी बैठक शिमला में

करने के लिए प्राधिकृत होगी।’’

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः क्या माननीय सदस्य ने नाम दे दिए हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं अभी सूची दे दूंगा।

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः नाम पहले ही दिए जाने चाहिए थे।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं समझता हूं कि माननीय सदस्यों तक यह संदेश ले जाने में मुझे सदन का अधिक समय लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस विधेयक के तीन मुख्य उपबंध हैं। यह विधेयक ऐसे कामगारों को जो युद्ध के आघातों के शिकार हुए हैं मुआवजा देने का उपबंध करता है। विधेयक का दूसरा उद्देश्य है नियोजकों को ऐसे मुआवजे के लिए उत्तरदायी बनाना और तीसरा उद्देश्य है नियोजकों पर अधिरोपित दायित्वों के लिए उन्हें बीमा करने के लिए मजबूर करना।

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) खंड 2, 31 मार्च, 1943, पृष्ठ 1649-51