युद्ध आहत (मुआवजा बीमा) विधेयक
61
को मुआवजे के भुगतान में अंशदान करेंगे। तीसरे, इसका भार भी समानुपाती है, क्योंकि यह प्रत्येक नियोजक के मजदूरी बिल पर आधारित है।
अतः, महोदय, यह स्पष्ट होगा कि यह विधेयक एक बहुत ही सरल विधान है। मैं यह भी कहूंगा कि यह विवाद-रहित उपाय है। सदन को यह जानकारी भी देना चाहूंगा कि विधेयक का विचार 1942 के आरंभ में बंबई स्थित मिल-मालिकों के संघ से आया। भारत सरकार के पास सुझाव भेजने के पश्चात अप्रैल, 1942 में श्रम विभाग के सचिव सर हेनरी रिचर्डसन और सर फ्रेड्रिक जेम्स, मि. हेडो, मि. ग्विल्ट और मि. हुसैन भाई लाल जी के बीच एक अनौपचारिक सम्मेलन हुआ था। इनके सुझाव पर नियोजकों से परामर्श किया गया। दो नियोजक संगठनों से बातचीत की गई तथा दो अखिल भारतीय औद्योगिक नियोजक संगठनों ने इस उपाय का पूर्णतः समर्थन किया। जहां तक नियोजकों के फेडरेशन का संबंध है, दुर्भाग्यवश इस संगठन में भिन्नता थी। उनमें से कुछ इसके पक्ष में है जबकि अन्य विरोध में। जहां तक श्रमिक प्रतिनिधित्व का संबंध है, स्थायी श्रमिक समिति ने इस उपाय की अनुशंसा सर्वसम्मति से की है। मैं नहीं समझता हूं कि इस विधेयक के उपबंधों को पूर्णतः सदन को समझाने के लिए किसी और स्पष्टीकरण की जरूरत है। महोदय, अपनी इन टिप्पणियों के साथ मैं प्रस्ताव प्रस्तुत करता हूं।
* * *
ऽमाननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मुझे यह जानकार खुशी हो रही है कि इस प्रस्ताव को जिसे प्रस्तुत करने का आज सुबह मुझे अवसर मिला इतना व्यापक समर्थन मिल रहा है। आलोचना में जो शब्द कहे गए हैं वे आश्चर्यजनक रूप से बहुत थोड़े हैं और उनमें से अधिकतर मेरे माननीय मित्रगण श्री मिलर और श्री जोशी ने कहे हैं। माननीय मित्र श्री मिलर ने कहा है कि यह जरूरी है कि इस विधेयक के संबंध में सरकार और अधिक जानकारी दे। ऐसी सूचनाएं देने में मुझे बराबर खुशी होगी यदि वे कृपा कर यह बताएं कि उनके मन में किस बात की चिंता है। उनके द्वारा एक और प्रश्न उठाया गया कि उनके मन में भेदभाव की कतिपय आशंका उठी है कि युद्ध आहत अध्यादेश के अधीन दिए जाने वाली दरों और प्रस्तुत विधेयक में प्रस्तावित दरों में अंतर है। इसके संबंध में मेरा कहना है कि वे गलतफहमी में है क्योंकि, जैसा मैंने स्पष्ट करने की कोशिश की है, इस विधेयक का उद्देश्य वास्तव में उन लोगों की स्थिति को बराबरी पर लाना है जो आहत अध्यादेश के अधीन आते हैं और जो इस समय प्रस्तुत विधेयक के अंतर्गत आते हैं। जैसा मैंने कहा था, युद्ध
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) खंड 2, 31 मार्च, 1943, पृष्ठ 1659-61