11. युद्ध आहत (मुआवजा बीमा) विधेयक - Page 87

62 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आहत व्यक्तियों को दी जाने वाली दरों की जांच करने पर हमने पाया कि जो लोग चौबीस रुपए और उससे ऊपर पाते हैं उन्हें राहत दी जाती है और जो लोग चौबीस रुपए और उससे निम्न मजदूरी पाते हैं उन्हें मुआवजा दिया जाता है और अभी इस विधेयक के द्वारा हम जो प्रस्ताव कर रहे हैं वह उन लोगों को भी मुआवजा देने का है जो चौबीस रुपए से ऊपर पाते हैं। अतः मेरे माननीय मित्र यह देख सकेंगे कि हम भेदभाव नहीं कर रहे। हम तो उन सभी कामगारों की स्थिति को समान बनाने जा रहे हैं जिन पर से दोनों कानून लागू होंगे। मैं जो मुद्दा मेरे माननीय मित्र श्री मिलर ने उठाया। उसकी प्रशंसा करता हूं अर्थात् यह कि यह विधेयक कतिपय ऐसे कामगारों या कामगारों की ऐसी श्रेणियों तक सीमित है जिन्हें खंड (5) में परिभाषित किया गया है। यह बात विधेयक के उपबंधों से स्वतः बहुत स्पष्ट है। किन्तु जैसा मैंने कहा था, दो परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार इसे सभी प्रकार के कामगारों पर लागू नहीं कर सकती। पहली यह कि सरकार के लिए यह संभव नहीं है कि सभी कामगारों को मुआवजा देने का दायित्व वह अपने ऊपर ले और दूसरी यह कि बीमा की कोई स्कीम जिसे सरकार चालू करती है प्रशासनिक रूप से चलाने योग्य अवश्य होने चाहिए। निष्कर्ष यह है कि सरकार सभी किस्म के कामगारों को समेटने का भार नहीं संभाल सकती क्योंकि, जैसा मैंने कहा, सरकार की क्षमता से कहीं अधिक क्षमता की अपेक्षा रखने वाला ये दायित्व है। यह स्कीम प्रशासनिक रूप से कार्यक्षम नहीं होगी। बीमा की स्कीम चलाई जा सके इसलिए यह बहुत स्पष्ट है कि हम नियोजक को खोजें जिसके ऊपर यह दायित्व निश्चित रूप से डाला जा सके और जिससे हम प्रीमियम वसूल सकें। सामान्य जनसंख्या के मामले में, ऐसे व्यक्ति को ढूढ़ निकालना जिस पर यह दायित्व लादा जा सके और जिससे प्रीमियम की मांग की जा सके, संभव नहीं हैं। यही कारण है कि इस स्कीम को ऐसे कतिपय कामगारों की श्रेणियों तक सीमित करना पड़ा है जिन्हें खंड 5 में परिभाषित किया गया है। मेरे माननीय मित्र श्री मिजर कहते है कि खण्ड 5 में परिभाषित कामगारों की श्रेणियों तक स्कीम को सीमित करने के संबंध में हमने कोई औचित्य नहीं दर्शाया है। कुछ उत्तर जो मैं उन्हें देता वे मेरे माननीय मित्र श्री जोशी पहले ही दे चुके हैं और मैं उनकी पुनरावृत्ति नहीं करना चाहता। ये उत्तर वस्तुतः उद्देश्यों और कारणों के विवरण में देखे जा सकते हैं। उद्देश्यों और कारणों के विवरण के पैरा दो में वह स्पष्ट है कि उन्हें कारखानों और अन्य औद्योगिक कारोबारों में खतरा है। मैं कहना चाहूंगा कि यह पर्याप्त स्पष्ट कारण है जो उनसे परिभषित कामगारों की श्रेणियों तक सीमित करने के लिए दिया जा सकता है। इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि कारखाने और उद्योग दुश्मनों के आक्रमण के सीधे निशान होते हैं तथा इनमें काम करने वाले लोगों को सामान्य जनता की अपेक्षा अधिक खतरा है।