युद्ध आहत (मुआवजा बीमा) विधेयक
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माननीय मित्र श्री जोशी द्वारा प्रश्न उठाया गया कि यह विधेयक सभी कामगारों पर लागू नहीं होता है और उन्होंने दो विशेष मामलों का उल्लेख किया इच्छा जाहिर की कि इस विधेयक के उपबंधों का विस्तार असम के चाय बागानों में काम कर रहे कामगारों और सागर नाविकों तक किया जाए। इसके संबंध में मुझे कहना है कि निस्संदेह ये मामले ऐसे हैं जिनके बारे में कुछ खास उत्तर की आवश्यकता है। महोदय, श्रीमान जोशी की आलोचना के सामान्य उत्तर में खासकर इन दो बिंदुओं के संबंध में मुझे कहना है कि सरकार को इस बात की पूरी जानकारी है कि उन्होंने क्या कहा है कि सही कारण है कि खंड 5 के साथ उपखंड (ग) जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से सरकार ने यह शक्ति अपने पास आरक्षित कर ली है कि इस विधेयक के उपबंधों को किसी दूसरे नियोजन में नियोजित अन्य कामगारों तक विस्तारित किया जा सके। सरकार यह नहीं मानती है कि कामगारों की जो कोटियां परिभाषित की गई हैं वे अंतिम हैं और इसमें अन्यों को शामिल नहीं किया जा सकेगा।
डॉ. पी. एन. बनर्जीः ये पूरी नहीं हैं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः ये पूरी नहीं है, और इसीलिए यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जब सरकार को यह स्पष्ट झलकने लगता है कि विधेयक के उपबंधों को अन्य नियोजनों में कार्यरत कामगारों तक विस्तारित किया जाए तो सरकार निस्संदेह उस पर विचार करेगी।
असम से संबंधित प्रश्न के विषय में जो एक बात मैं स्पष्ट करना चाहूंगा वह यह है कि जैसा मैंने कहा, हम इस विधेयक को ऐसे कामगारों तक सीमित रख रहे हैं जो ऐसे स्थानों में रह रहे हैं जिन्हें असुरक्षित केंद्र कहा जा सकता है। मेरे विचार से, और प्राप्त हुई सूचनाओं के अनुसार, यह नहीं कहा जा सकता कि चाय बागान भी ऐसे असुरक्षित केंद्रों में आते हैं। यदि किसी समय ऐसा होता है कि चाय बागान असुरक्षित केंद्र बन जाते हैं और उन पर खतरा मंडराने लगता है तब इसमें संदेह नहीं है कि या तो श्री जोशी इस विषय को उठाएंगे या सरकार इसके प्रति खबरदार होगी और ऐसा उपाय करेगी कि इस विधेयक के उपबंधों का विस्तार असम के श्रमिक तक किया जाए।
जहां तक सागर नाविकों का प्रश्न है, मैं समझता हूं, वाणिज्य विभाग ने इस विषय को उठाया था और मुझे मालूम हुआ कि इस संबंध में कोई प्रावधान पहले से विद्यमान है जिसके अंतर्गत उन्हें प्राप्त होने वाला लाभ यदि इतना न भी हो जो इस विधेयक में सन्निवष्टि है, तो भी वह कम से कम हमारी इस स्कीम से मिलता-जुलता अवश्य है। यदि मेरे माननीय मित्र श्री जोशी सोचते हैं कि प्रवर समिति द्वारा इसकी जांच कर ऐसा उपबंध करना वांछनीय है जो इस विधेयक के मुख्य लक्षणों और