15. मंत्रिमंडल प्रतिनिधियों, फील्ड मार्शल वाइकाउंट वेवल और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के बीच हुई बैठक के लिए टिप्पणी - Page 101

86 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

मानसिक क्षमता से परे था जिसे प्रांतीय विधान सभाएं भेजने की आशा करती थीं, और जो विशेषज्ञों का कार्य था।

(ख) साम्प्रदायिक प्रश्न।

इन शीर्षकों के प्रथम शीर्षक के अंतर्गत आने वाले प्रश्नों को उस आयोग को सौंपा जाना चाहिए जिसका अध्यक्ष ग्रेट ब्रिटेन अथवा अमेरिका का प्रमुख संवैधानिक विशेषज्ञ हो। अन्य सदस्यों में दो सदस्य भारतीय विशेषज्ञ होने चाहिए तथा उनमें से एक सदस्य हिन्दू और एक मुसलमान समुदाय का होना चाहिए। इस आयोग का विचारार्थ विषय भारत सरकार अधिनियम, 1935 होना चाहिए और इससे यह अपेक्षा की जानी चाहिए कि विद्यमान अधिनियम में जरुरी परिवर्तनों की सिफारिश दे।

(ख) के अंतर्गत प्रश्नों को विभिन्न समुदायों के नेताओं के सम्मेलन में भेजा जाना चाहिए। यदि सम्मेलन सहमत समाधान पर पहुंचने में असफल रहा तो महामहिम की सरकार को एक पंचाट (एवार्ड) बनाना होगा। यदि उचित हुआ, तो निस्संदेह इसे स्वीकार किया जाएगा।

इसके बाद डॉक्टर अम्बेडकर ने अनुसूचित जातियों की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। अनुमान लगाया गया था कि उनकी संख्या छः करोड़ है जबकि यह आंकड़ा सही नहीं था क्योंकि, सर्वप्रथम, राज्यों के विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध नहीं थे और दूसरे, जनगणना को राजनीति के साथ जोड़ दिया गया था। ये सभी लोग गंभीर दबावों में थे। गांवों में उनके पास भूमि नहीं थी और वे वास्तव में सवर्ण्ा हिन्दुओं के दास थे। हिन्दुओं की शक्ति का उदाहरण लिया जाए तो इस बारे में उन्होंने बताया कि यदि कुछ अछूत लोग गांव छोड़कर सेना में अच्छे वेतन पर काम करने लगते थे तो सवर्ण हिन्दू अपनी शक्ति से ऐसा प्रबंध कर लेते थे कि वे अछूत लोग फिर उनके काम पर आने को मजबूत हो जाएं। सरकारी अधीनस्थ पुलिस और राजस्व सेवाओं में सवर्ण्ा हिन्दूओं की प्रचुरता पहले ही से थी, उन सेवाओं में ब्रिटिश की अपेक्षा विशेषकर हिन्दू काम पर लगाए जाते थे। एक उदाहरण है कि जब से गांधी जी पर पत्थर फेंकने के लिए अछूतों के 100 लडंको को हाल ही में बम्बई में गिरफतार किया गया तो उस समय पुलिस को भी अवसर मिल गया और शहर में अनुसूचित जातियों को काफी हानि पहुंचाई गई।

राजनीतिक दृष्टि से, यद्यपि अन्य समुदायों के समान अनुसूचित जातियों को 1932 में अलग निर्वाचन क्षेत्र प्रदान किए गए थे, परंतु उन्हें पूना पेक्टऽ द्वारा इन निर्वाचन क्षेत्रों से वंचित कर दिया गया था। इसके बजाय उन्हें दोहरे चुनाव की प्रणाली दी

ऽ देखिए संख्या 45, टिप्पणी 3