15. मंत्रिमंडल प्रतिनिधियों, फील्ड मार्शल वाइकाउंट वेवल और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के बीच हुई बैठक के लिए टिप्पणी - Page 102

सत्ता हस्तान्तरण संबंधी महत्वपूर्ण पत्र-व्यवहार

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गई जिसके अनुसार जब सभी हिन्दुओं ने दूसरे निर्वाचन में मतदान किया तो उन प्रथम चुनावों के परिणामों को नकार दिया गया जिसमें केवल अछूत ही मतदाता थे। उन्होंने 2 अप्रैल की कार्यकारी समिति के प्रस्ताव के साथ संलग्न आंकड़ों का संदर्भ दिया जिससे, सर्वप्रथम, यह प्रदर्शित हुआ कि अनेक मामलों में यद्यपि कांग्रेसी अनुसूचित जाति के उम्मीदवार प्राथमिक चुनाव में फेडरेशन के उम्मीदवार से हार गए थे, फिर भी अंतिम चुनाव में उन्होंने उनको हरा दिया। दूसरे, सामान्य मतदाताओं की तुलना में अनुसूचित जातियों के मतदाताओं की संख्या बहुत कम थी। ऐसा होते हुए भी, कांग्रेस लूट-पाट और आगजनी पर उतर आयी ताकि वह अपने उम्मीदवारों की सफलता सुनिश्चित कर सके। उन्होंने बड़ी संख्या में फोटो प्रस्तुत किए जिनसे कांग्रेस के कारनामों का पता लगता था।

केन्द्रीय विधान सभा 1919 से ही अस्तित्व में रही हैं परंतु इस बारे में कमी भी अनुसूचित जातियों की सहायता के उद्देश्य पूर्ति हेतु न प्रश्न किए गये, न प्रस्ताव आए, न अन्य कार्य हुआ।

भारतीय रिसासतों में अनुसूचित जातियों की स्थिति विशेष रूप से खराब थी। यहां तक कि अनुसूचित जातियों के लिए कुछ खाद्य पदार्थों का खाना भी निषेध था। ऐसी प्रतिनिधित्व वाली संस्थाओं में, जो अब कुछ रिसायतों में स्थापित की जा रही हैं, मुसलमानों के सिवाय किसी भी समुदाय को अलग से प्रतिनिधित्व पाने का अधिकार नहीं था। राजनीतिक विभाग को इन संवैधानिक प्रयोगों में अधिक रूचि दिखानी चाहिए थी और यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि अनुसूचित जातियों को अलग निर्वाचन-क्षेत्र दिए जाते। प्रतिनिधि मंडल को अखिल भारतीय अनुसूचित जातियों के रियासतों के सम्मेलन के अध्यक्ष से भेंट करनी चाहिए थी।

अनुसूचित जातियों को ईस्ट इंडिया कंपनी की फोज में सबसे पहले भरती होने का अवसर मिला था और इस प्रकार उनकी सहायता से ब्रिटिश को भारत की विजय प्राप्त करने का अवसर मिला। तब से वह अंग्रेजों में मिले हैं किन्तु फिर भी ब्रिटिश ने कभी सचेत होकर और जानबूझ कर उनकी सहायता नहीं की, यद्यपि 1892 से उन्होंने मुसलमानों की बहुत सहायता की है।

उनका विचार था कि यदि भारत स्वतंत्र होता है तो यह एक विकराल आपदा होगी। ब्रिटिश को यहां से जाने से पूर्व यह आश्वस्त करना चाहिए कि नए संविधान में अनुसूचित जातियों को जीवन के सामान्य मानव अधिकार, स्वतंत्रता और खुशी के तत्व दिए जाएं। इस प्रयोजन की प्राप्ति के लिए वह उनके लिए अलग निर्वाचन-क्षेत्र पुनः स्थापित करें तथा उन्हें अलग से सुरक्षा प्रदान की जाए जिसकी वे मांग करते