15. मंत्रिमंडल प्रतिनिधियों, फील्ड मार्शल वाइकाउंट वेवल और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के बीच हुई बैठक के लिए टिप्पणी - Page 103

88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

रहे हैं। इस समय उनकी जागी हुई चेतना उन्हें आतंकवाद और साम्यवाद की ओर ले जा रही है। वह अपने अनुयाइयों के साथ संवैधानिक तरीकों के सामर्थ्य की परीक्षा पर हैं।

लॉर्ड पेथिक-लारेंस ने कहा कि अभी तक भारतीय राजनीति पर दो मुद्दे छाए रहे हैं। एक ओर ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता प्राप्त करने का प्रश्न था तो दूसरी ओर, हिन्दू-मुस्लिम समस्या के समाधान का प्रश्न था। यदि इन पर एक बार सफलता मिल जाती तो पार्टी विभाजन शायद आर्थिक मुद्दों पर होता। वास्तव में अनुसूचित जातियों को ब्रिटिश पर विश्वास करने की अपेक्षा वाम पक्ष पर विश्वास करना अभीष्ट था क्योंकि ब्रिटिश अपनी शासनसत्ता को सौंपने वाले थे। इसके उत्तर में डाक्टर अम्बेडकर ने फिर दोहराया कि जब तक संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र विद्यमान हैं, अनुसूचित जातियों के मतों की संख्या इतनी कम होगी कि हिन्दू उम्मीदवार आसानी से उनकी इच्छाओं की अवहेलना कर सकते हैं। निस्संदेह, वर्तमान पद्धति के अधीन उन्हें अंतिम चुनावों में अछूतों को मत देना था, परंतु ऐसा करने में उनका लक्ष्य अपने उम्मीदवार का समर्थन करना नहीं अपितु फेडरेशन द्वारा भेजे गए उम्मीदवार को अधिक मतों से पराजित करना था। अलग निर्वाचन क्षेत्रों का बनाया जाना आधारभूत था क्योंकि अनुसूचित जातियां उनके बिना अपने प्रतिनिधि कभी नहीं भेज पायेंगी।