18. डॉ. अम्बेडकर का श्री ए.बी.एलेक्जेंडर, सदस्य, केबिनेट मिशन, को पत्र - Page 112

सत्ता हस्तान्तरण संबंधी महत्वपूर्ण पत्र-व्यवहार

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वे बहुसंख्यक को जीत नहीं सकते क्योंकि बहुसंख्यक अपनी रचना में साम्प्रदायिक हैं, कहना चाहिए कि वे स्थिर और पूर्व-निर्धारित हैं। अल्पसंख्यक यही कर सकते हैं कि वे अपने को ऐसी स्थिति में डालें कि ऐसी शर्तो के सुनिश्चित करने योग्य हो सकें जिन पर वे बहुसंख्यकों के साथ काम कर सकें। और उन पर इस बात का दबाव नहीं डाला जाए कि वे बहुसंख्यकों द्वारा प्रस्तावित शर्तो को स्वीकार करें। दूसरे, यदि बहुसंख्यक उनके साथ काम करने से इनकार करें तथा अपनी भूलों को समाप्त करने पर राजी नहीं हों तो अल्पसंख्यकों को यह स्वतंत्रता होगी कि वे विधानमंडल में बहुसंख्यकों के प्रति अपना विरोध प्रकट करें। विरोधी करने की अपनी स्वतंत्रता अछूत किस प्रकार बनाए रख सकते हैं? तभी जब विधान सभा में उनके प्रतिनिधि अपने चुनाव के लिए बहुसंख्यकों के मतों पर आश्रित न हों। अलग चुनाव-क्षेत्र के लिए उनकी मांग का यही आधार है।

  1. अनुसूचित जातियों के लिए तब तक किन्हीं भी संरक्षणों का कोई मूल्य नहीं है जब तक कि उनके लिए अलग निर्वाचन-क्षेत्र न बनाए जाएं। अलग निर्वाचन-क्षेत्र इस मामले का निर्णायक कदम है। मेरे सामने उस प्रतिवेदन की एक प्रति है जिसे उन तीन कांग्रेसी हरिजनों ने केबिनेट मिशन को प्रस्तुत किया था और मिशन द्वारा 9 अप्रैल, 1946 को जिनका साक्षात्कार किया गया था। वे टूली स्ट्रीट के उन तीन दर्जियों से बेहतर नहीं थे जिन्होंने संसद को संबोधित करने का दुस्साहस करके कहा था, ‘‘हम इंग्लैंड के नागरिक हैं।’’ इसके अलावा यह ध्यान देने योग्य बात है कि अनुसूचित जातियों की फेडरेशन की ओर से मेरे द्वारा रखी गई मांगे और इन कांग्रेसी हरिजनों द्वारा रखी गई मांगों में कोई अंतर नहीं है। यदि कोई अंतर है तो उसका संबंध निर्वाचन-क्षेत्रों के प्रश्न पर आधारित है। मैं यह नहीं जानता कि आपने कांग्रेस हरिजनों की मांगों की क्या व्यवस्था की है। वे वास्तविक मांगे नहीं है। वे मांगे इस बात की अभिव्यक्ति करती हैं कि राजनीतिक सुरक्षा के रूप में कांग्रेस अछूतों को क्या देने के लिए तैयार है। यह मेरी गलतफहमी नहीं है, यह मेरा ज्ञान है। मुझे ऐसे लोगों से सूचना मिली है जो कांग्रेस के मन की बात समझते हैं कि यदि मैं संयुक्त-निर्वाचन क्षेत्रों को स्वीकार कर लूं तो कांग्रेस अपनी ओर से मेरी अन्य मांगों को स्वीकार करने के लिए बिलकुल तैयार है। आप सोचते होंगे कि कांग्रेस अनुसूचित जातियों की सभी मांगों को स्वीकार करने के लिए क्यों तैयार है, केवल एक मांग को छोड़कर, अर्थात् अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग को छोड़कर। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी यदि आपको यह मालूम हो कि कांग्रेस क्या खेल खेल रही है। यह बहुत गहरी चाल है। यह महसूस करते हुए कि अछूतों को कुछ सुरक्षाएं दिए बिना छुटकारा नहीं हो सकता, सरकार यह पता लगाना चाहती है कि ऐसे क्या उपाय हैं जिनसे उन सुरक्षाओं को निष्प्रभावी बनाया जा सके। यह बात संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्र की पद्धति में निहित है कि कांग्रेस ऐसा कानून लाना चाहती है कि सुरक्षाओं का कोई प्रभाव न हो।