18. डॉ. अम्बेडकर का श्री ए.बी.एलेक्जेंडर, सदस्य, केबिनेट मिशन, को पत्र - Page 113

98 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

यही कारण है कि कांग्रेस संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्रों पर जोर दे रही है। संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्रों का यह अर्थ है कि अछूतों को शक्ति दिए बिना पद दिए जाएं। अछूत चाहते हैं कि उन्हें शक्ति के साथ पद मिलें। यह वे अलग निर्वाचन-क्षेत्रों से ही प्राप्त कर सकते हैं और यही कारण है कि वे इस बात के लिए जोर दे रहे हैं।

  1. मुझे विश्वास है कि अनुसूचित जातियों के लिए अलग-निर्वाचन-क्षेत्र के पक्ष का मामला सुदृढ़ है। कांग्रेस के सिवाय प्रत्येक पार्टी इस सुझाव को स्वीकार करती है। अलग निर्वाचन-क्षेत्रों के पक्ष में तर्क मेरे 3 मार्च, 1946 के उस पत्र में दिए गए हैं जो लार्ड वेवल को भेजा गया था और शायद उन्होंने यह पत्र आपको दिखाया हो। अतः उस पत्र को फिर दुहराना अनावश्यक है। प्रश्न यह है कि अनुसूचित जातियों की इस मांग के बारे में मिशन को क्या करना है। क्या मिशन अछूतों को हिन्दुओं के राजनीतिक बंधन से मुक्त करना चाहता है? अथवा वह संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्रों की पद्धति द्वारा उन्हें भेडि़यों के सामने डालना चाहता है ताकि वे कांगेस और उस हिन्दू बहुसंख्यक वर्ग के साथ भिन्नता कर सकें जिसके वे प्रतिनिधि कहे जाते हैं? अनुसूचित जातियां महामहिम की सरकार से यह पूछने का अधिकार रखती है कि क्या महामहिम की सरकार ब्रिटिश राज छोड़ने से पूर्व यह आश्वस्त करेगी कि स्वराज अछूतों के लिए फांसी का फंदा न बन जाए।

  2. मुझे यह कहने की अनुमति दी जाए कि ब्रिटिश का अनुसूचित जातियों के प्रति नैतिक दायित्व है। सभी अल्पसंख्यक वर्गो के प्रति उनके नैतिक दायित्व हैं, परंतु ये दायित्व कभी भी उस नैतिक दायित्व से आगे नहीं बढ़ सकते जो उन्हें अछूतों के संबंध में निभाना है। यह दुःख की बात है कि कुछ ब्रिटिश लोक ही इससे अवगत हैं और कितने कम लोग इसे निभाना चाहते हैं। भारत में ब्रिटिश शासन का अस्तित्व अछूतों द्वारा की गई सहायता पर निर्भर करता है। अनेक ब्रिटिश लोग यह सोचते हैं कि भारत पर वियज क्लाइव, हेस्टिंग्स, कूट्स और इसी प्रकार के अन्य सेनापतियों द्वारा हुई है। इससे अधिक गलती और नहीं हो सकती। भारत पर विजय भारतीयों की सेनाओं द्वारा हुई और जो भारतीय इस सेना में थे वे सभी अछूत थे। ब्रिटिश शासन भारत में कभी भी संभव न होता यदि अछूतों ने ब्रिटिश लोगों की भारत पर विजय पाने में सहायता न की होती। प्लासी के युद्ध को ही लीजिए। इस युद्ध से ब्रिटिश शासन का प्रारंभ हुआ या किर्की की लड़ाई को देखिए जिसने भारत पर विजय को पूरा कराया। इन दोनों भाग्य-निर्णायक लड़ाइयों में जो सैनिक ब्रिटिश के लिए लड़े, वे सभी अछूत थे।

  3. ब्रिटिश ने उन अछूतों के लिए जो उनके लिए लड़े क्या किया? यह शर्मनाम कहानी है। सबसे पहले काम उन्होंने यह किया कि सेना में अछूतों की भर्ती रोक दी। इतिहास में इससे अधिक अकृतज्ञ और कठोर कार्य शायद ही मिले। सेना में अछूतों के लिए द्वार बंद कर दिए जाने से ब्रिटिश ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि अछूतों ने