100 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
और शक्ति सौंप रहे हैं?’’ क्या आप ब्राह्मणवाद के पक्षपोषकों को यह भार सौंप रहे हैं, जिसका अर्थ यह है कि अछूतों के अत्याचारियों और दमनकारियों को यह सत्ता सौंप रहे हैं?’’ भारत में ब्रिटिश साम्राज्य को समाप्त करने का यह तरीका अन्य पार्टियों के अंतःकरण को न छुए, परंतु ब्रिटिश लेबर पार्टी के बारे में क्या कहा जाए? लेबर पार्टी अधिकारहीनों तथा दलितों के लिए खड़े होने का दावा करती है। यदि यह बात अपने मर्म में सही है, तो मुझे कोई संदेह नहीं कि यह भारत के करोड़ों अछूतों के साथ खड़ी होगी तथा अछूतों की स्थिति बचाए रखने के लिए आवश्यक सभी कुछ करेगी और ऐसी हाथों में शक्ति को हस्तांतरित किए जाने की अनुमति नहीं देगी जो अपने जीवन के दर्शन तथा धर्म के कारण शासन करने के योग्य नहीं हैं और अछूतों के शत्रु हैं। अनुसूचित जातियों के प्रति लापरवाही के लिए ब्रिटिश की ओर से यह प्रायश्चित होगा क्योंकि वे सदैव ही अनुसूचित जातियों के न्यासधारी रहे हैं।
- मैंने इतने विस्तार से अपने मन को हल्का किया है, परंतु अछूतों ने संवैधानिक सुरक्षा का जो प्रश्न उठाया है, उसके प्रति मिशन के मौन से मेरे मन में चिंता पैदा हो गई है। जो आश्वासन महामहिम की सरकार ने अछूतों तथा अल्पसंख्यकों को दिए हैं उनके प्रति मिशन के रूख से मेरी चिंता और गहरी हो गई है। इन आश्वासनों के संबंध में मिशन की प्रवृत्ति से लार्ड पामर्सटन की याद आती है जिन्होंने कहा था, ‘‘हमारे कोई भी स्थाई शत्रु नहीं हैं, हमारे कोई भी स्थाई मित्र नहीं हैं। हमारे केवल स्थायी हित हैं।’’ आप भलीभांति यह अनुमान लगा सकते हैं कि यह कैसी भयानक संभावना होगी जो आप अछूतों को देंगे यदि यह बात पैदा हो जाए कि मिशन पामर्सटन की उक्ति को अपना मार्गदर्शक तत्व मानता है। आप ग्रेट ब्रिटेन के अल्प-सुविधा-प्राप्त वर्ग से उभरे हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि आप वह सब कुछ अवश्य करेंगे जिससे भारत के अल्प-सुविधा-प्राप्त 6 करोड़ लोगों को संभावित विश्वासघात से बचाया जा सके। यही कारण है कि मैंने उनके मामले को आपके समक्ष प्रस्तुत किया है। यदि आप यह कहने की मुझे अनुमति दें, तो मैं कहूंगा कि अछूतों की यह भावना है कि इस मिशन में आपके सिवाय उनका कोई भी बड़ा मित्र नहीं है।
भवदीय
बी.आर. अम्बेडकर द राइट ऑनरेबल श्री ए.वी. एलेक्जेंडर,
सी.एच.एम.पी., सदस्य, केबिनेट मिशन,
वायसराय हाऊस, नई दिल्ली।