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डॉक्टर अम्बेडकर का लॉर्ड पेथिक-लारेंस को पत्र
एल/पी एंड जे/10/43ः एफ.96-8)
22, पृथ्वीराज रोड, नई दिल्ली,
22 मई, 1946
ऽप्रिय लार्ड पेथिक-लारेंस,
केबिनेट मिशन ने जो वक्तव्य जारी किया है, उसके अध्ययन से मुझे लगा कि कुछ ऐसी बातें हैं जिनमें बहुत संदिग्धता है। इनका उल्लेख इस प्रकार है-
क्या वक्तव्य के पैरा 20 में उल्लिखित शब्द ‘‘अल्पसंख्यक वर्ग’’ में अनुसूचित जातियां भी शामिल हैं?
पैरा 20 में कहा गया है कि नागरिकों, अल्पसंख्यकों और जनजातीय वर्गो तथा बाह्य क्षेत्रों के लोगों के अधिकारों की सलाहकार समिति में प्रभावित लोगों के हितों का पूर्ण प्रतिनिधित्व होना चाहिए। यह कौन देखेगा कि क्या सलाहकार समिति प्रभावित लोगों के हितों का वास्तव में पूर्ण प्रतिनिधित्व रखती है?
प्रभावित लोगों के हितों की सुरक्षा के लिए पूर्ण प्रतिनिधित्व हेतु क्या महामहिम की सरकार यह अधिकार अपने पास रखेगी कि इस प्रकार के हितों के प्रतिनिधित्व के लिए वह संविधान सभा से बाहर के लोगों को समिति में नामांकित करें? बाह्य क्षेत्र के लोगों का नामांकन आवश्यक प्रतीत होता है क्योंकि संविधान सभा में से बाह्य क्षेत्रों के लोगों और जनजातियों को प्रतिनिधित्व प्राप्त करने का कोई अन्य तरीका नहीं है। यदि नामांकन किए जाने की आवश्यकता स्वीकार कर ली जाती है, तो क्या संविधान सभा के बाहर अनुसूचित जातियों के सदस्यों के नामांकन के सिद्धांत का विस्तार किया जाएगा ताकि सलाहकार समिति में अनुसूचित जातियों का पूर्ण प्रतिनिधित्व प्राप्त किया जा सके?
संशोधन के पैरा 22 में संघीय संविधान सभा और ब्रिटेन के बीच ऐसे मामलों के बारे में एक संधि की व्यवस्था है जो शक्ति के हस्तांतरण के परिणामस्वरूप उठ
ऽ द ट्रांसफर ऑफ पॉवर, खंड 7, संख्या 359, पृष्ठ 661-62