सत्ता हस्तान्तरण संबंधी महत्वपूर्ण पत्र-व्यवहार
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कार्यकारी समिति ने बड़े क्षोभ से यह नोट किया कि केबिनेट मिशन ने अपने 5,000 शब्दों के वक्तव्य में एक बार भी अनुसूचित जातियों के बारे में उल्लेख नहीं किया है। केबिनेट मिशन की सोच के बारे में समझना कठिन है। मिशन अछूतों के अस्तित्व और अनुसूचित जातियों के प्रति स्वर्ण हिन्दुओं के दिन प्रति दिन के अत्याचारों और दमन से अवगत होगा। केबिनेट मिशन महामहिम सरकार द्वारा की गई इन घोषणाओं से भी अवगत होगा कि अछूत सवर्ण हिन्दुओं से अलग थे और भारत के राष्ट्रीय जीवन में एक अलग तत्व के समान उनका अस्तित्व था। केबिनेट मिशन उन प्रतिज्ञाओं से अपरिचित नहीं होगा जो महामहिम की सरकार ने दी थी कि ऐसा कोई भी संविधान अनुसूचित जातियों पर आरोपित नहीं किया जाएगा जिसके बारे में अनुसूचित जातियां अपनी अनुमति न दें। केबिनेट मिशन को इस तथ्य से अवगत होना होगा कि एक वर्ष पूर्व लॉड वेवल द्वारा शिमला सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें सवर्ण हिन्दुओं से अलग अनुसूचित जातियों को प्रतिनिधित्व दिया गया था। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, कार्यकारी समिति यह कहने में कोई झिझक महसूस नहीं करती कि जिस तरीके से अनुसूचित जातियों की उपेक्षा की गई है, उसके फलस्वरूप केबिनेट मिशन ने ब्रिटिश राष्ट्र के नाम की बदनामी की है और उसके नाम पर कलंक लगाया है।
कार्यकारी समिति ने केबिनेट मिशन के द्वारा प्रेस साक्षात्कार के दौरान दिए गए वक्तव्य देखें हैं जिनमें यह कहा गया है कि मिशन ने संविधान सभा तथा सलाहकार समिति में अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व के लिए दोहरी व्यवस्था की है। कार्यकारी समिति यह कहने को मजबूर है कि ये प्रावधान नितांत काल्पनिक हैं और गंभीरता से परे हैं। मिशन ने अपनी योजना में संविधान सभा में प्रांतीय विधान सभा द्वारा चुनाव के लिए अनुसूचित जातियों के लिए कोई भी सीट आरक्षित नहीं की है। प्रांतीय विधान सभा पर ऐसा कोई दायित्व नहीं है कि संविधान सभा के लिए अनुसूचित जातियों का विशिष्ट संख्या में चुनाव कराया जाए। यह बिल्कुल संभव है कि संविधान सभा अनुसूचित जातियों का कोई भी प्रतिनिधित्व न रखे। और यदि अनुसूचित जातियों के कुछ प्रतिनिधि संविधान सभा में स्थान प्राप्त कर लें और उन्हें हिन्दू मतों द्वारा चुना जाए तो वे कभी भी अनुसूचित जातियों के हितों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। जहां तक सलाहकार समिति का संबंध है, यह संविधान सभा से बहुत अलग नहीं हो सकती। यह संविधान सभा का केवल प्रतिबिम्ब होगी।
कार्यकारी समिति यह बिल्कुल नहीं समझ पाई है कि केबिनेट मिशन को किस प्रकार विश्वास हुआ कि उसने संविधान सभा तथा सलाहकार समिति में अनुसूचित जातियों की प्रभावकारी आवाज के लिए पर्याप्त और अच्छी व्यवस्था की