सत्ता हस्तान्तरण संबंधी महत्वपूर्ण पत्र-व्यवहार
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बचने के साधन के रूप में अलग व्यवस्थाओं हेतु संवैधानिक व्यवस्था रखी जाए।
- कार्यकारी समिति ने देखा कि केबिनेट मिशन ने अपने दूसरे वक्तव्यऽ में कहा है कि ब्रिटेन और भारतीय संविधान सभा के बीच होने वाली संधि की अभिपुष्टि तभी की जाएगी जब अनुसूचित जातियों सहित सब अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए समुचित उपाय किए गए हों। केबिनेट मिशन ने कांग्रेस पार्टी को संतुष्ट करने के लिए अपनी शीघ्रता में इस बात का साहस नहीं किया है कि वह अपने प्रथम वक्तव्य के
खंड 22 में इस उपबंध को सम्मिलित करे, यद्यपि यह 1942 के क्रिप्स प्रस्तावों का एक भाग था। जबकि कार्यकारी समिति इस बात से प्रसन्न है कि मिशन ने अपनी प्रतिष्ठा फिर प्राप्त कर ली है और उन ब्रिटिश लोगों के सम्मान को बचा लिया है जिनके नाम पर अनुसूचित जातियों को आश्वासन दिए गए थे, कार्यकारी समिति यह मांग करती है कि केबिनेट मिशन की योजना में ये संशोधन किए जाएं-
- वक्तव्य के पैरा 15 में, निम्नलिखित को खंड (7) और (8) के रूप
में जोड़ा जाए-
‘‘(7) अनुसूचित जातियों को अलग निर्वाचन क्षेत्रों के माध्यम से
विधान सभाओं में प्रतिनिधित्व का अधिकार होगा।
(8) संविधान में ऐसा उपबंध किया जाएगा जो सरकार पर यह दायित्व
डालेगा कि अनुसूचित जातियों के लिए अलग बसावटों की व्यवस्था की
जाए।’’
- प्रथम वक्तव्य के पैरा 20 को इस प्रकार संशोधित किया जाना चाहिए
कि अनुसूचित जातियों के उन सदस्यों को सलाहकार समिति का सदस्य
बनाया जाए जिन्होंने गत प्राथमिक चुनावों में सर्वोपरि स्थान प्राप्त किए थे
और उन्हें अनुसूचित जातियों के पांच अन्य सदस्यों को सलाहकार समिति
में चुनकर भेजने का अधिकार दिया जाए।
कार्यकारी समिति महामहिम सरकार और ब्रिटिश लेबर पार्टी को यह सूचित करना चाहती है कि केबिनेट मिशन द्वारा अनुसूचित जातियों के प्रति की गई गलतियों को शीघ्र सुधार कर अनुसूचित जातियों के प्रति वे अपनी सद्भावना व्यक्त करें। यदि ऐसा न किया गया तो अनुसूचित जातियों के लिए सीधी कार्यवाही करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। यदि प्रिस्थियितों की मांग हुई, तो कार्यकारी समिति अनुसूचित जातियों को इस आने वाले संकट से बचाने के लिए इस बात में हिचक नहीं करेगी कि वह अनुसूचित जातियों को प्रत्यक्ष कार्यवाई की अनुमति दें।
कार्यकारी समिति केबिनेट मिशन द्वारा प्रस्तुत योजना से अनुसूचित जातियों
ऽ संख्या 376