21. राय बहादुर शिवराज का फील्ड मार्शल वाइकाउंट वेवल को पत्र - Page 123

108 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

के मध्य पैदा हुई बेचैनी से अवगत है। कार्यकारी समिति अनुसूचित जातियों से यह कहना चाहती है कि वे साहस और वीरता बनाए रखें जैसी कि उन्होंने अकेले ही, साधन न होते हुए भी, कांग्रेस के विरूद्ध चुनाव लड़ने में दिखाई थी। बावजूद इसके कि कांग्रेस द्वारा हिंसा, अत्याचार और लूट-पाट की गई थी और जब हरेक अन्य पार्टी ने भी अपने द्वारा बंद कर लिए थे, वह उन्हें आश्वासन देती है कि डर की कोई बात नहीं है और यदि हम साहस तथा एकता का सहारा लें तो अनुसूचित जातियों के न्याय तथा मानवता के पक्ष की अवश्य विजय होगी, चाहे उनके शत्रुओं के इरादे कुछ भी क्यों न हों।

  1. कार्यकारी समिति एतत्द्वारा अध्यक्ष को प्राधिकार देती है कि वह एक कार्यवाही परिषद् का गठन करें और उसको यह कर्त्तव्य सौंपे कि प्रत्यक्ष कार्रवाई का क्या स्वरूप हो, किस प्रकार इसे प्रभावशील बनाया जा सकता है और यह कब प्रारंभ की जाए।

  2. कार्यकारी समिति ने देखा है किः

(1) सवर्ण हिन्दुओं द्वारा भारत भर के गांवों और नगरों में अनुसूचित जातियों

के प्रति किए जा रहे अत्याचार और दमन का सिवाय इसके कोई अन्य

कारण नहीं था कि उन्होंने कांगे्रेस के विरूद्ध चुनाव लड़े थे तथा इसमें

अनेक व्यक्ति घायल हुए और मारे गए_

(2) हिन्दू पुलिस के लिए यह शर्मनाम बात है कि उसने सवर्ण हिन्दुओं

का पक्षपात करने के लिए अनुसूचित जातियों के पुरूषों और महिलाओं को

कठोर यातनाएं दी और उनको गिरफतार किया_

(3) राशनिंग अधिकारी गैर-कानूनी तौर से कांग्रेस के पक्षपाती होने का

काम कर रहे हैं और अनुसूचित जातियों को राशन की आपूर्ति करने से

इनकार कर रहे हैं_

(4) समाचार पत्रों ने मौन रहने की साजिश की है क्योंकि इनमें निर्दोष

पुरूषों और महिलाओं पर किए गए अत्याचारों की भर्त्सना नहीं की गई

है_

(5) अनुसूचित जातियों के जीवन और सम्पत्ति को बचाने के लिए प्रान्तीय

सरकार द्वारा भेदभाव बरता गया है।

कार्यकारी समिति महसूस करती है कि बहुसंख्यक समुदाय का व्यवहार स्वयं ही यह सिद्ध करता है कि वह शक्ति सौंपे जाने के काबिल नहीं है और यदि बहुसंख्यक समुदाय ने अपनी नैतिकता में सुधार नहीं किया तो अनुसूचित जातियां प्रत्येक साधन से अपना बचाव करेंगी।