110 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
मुझे कहना है कि मैं यह विचार स्वीकार नहीं कर सकता कि केबिनेट मिशन और वायसराय अनुसूचित जातियों के प्रति अन्यायपूर्ण थे। 1945 में शिमला सम्मेलन में जो नीति अपनाई गई थी, उसे संशोधित किए जाने का कारण, जैसा कि आपने कहा है, गत वसंत में हुए प्रांतीय विधान सभाओं के चुनावों के नतीजे हैं। मिशन ने मतदान के आंकड़ों का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया है और मैंने स्वयं उनकी जांच की है। हम इस बात को मानते हैं कि वर्तमान निर्वाचन पद्धति उन अनुसूचित जातियों के उम्मीदवारों के प्रति न्याय नहीं करती जो कांग्रेस के विरोधी हैं। दूसरी ओर, मैं देखता हूं कि आंकड़ों से उस बात की पुष्टि नहीं होती है जो आप प्राथमिक चुनावोंऽ में अपने फेडरेशन के उम्मीदवारों की उपलब्धियों के बारे में कहते हैं। मैं यहां तथ्यों के ब्यौरे में जानना नहीं चाहता, परंतु ये तथ्य उन प्राथमिक चुनावों से संबंधित हैं जो आयोजित किए गए थे और 151 सीटों में से 43 सीटें अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित की गई थीं। इन 43 प्राथमिक चुनावों में अनुसूचित जातियों के फेडरेशन ने 22 सीटों पर चुनाव लड़ा था और चुनाव में केवल 13 सीटों पर उसे सर्वोच्च स्थान मिला था।
आपने अपने पत्र में तीन विशेष निवेदन किए हैं। [@] प्रथम निवेदन के बारे में मुझे यह बताना है कि महामहिम की सरकार चाहती है कि संविधान सभा को कार्रवाई करने की यथासंभव सर्वाधिक स्वतंत्रता होनी चाहिए जो 16 और 25 मई के केबिनेट मिशन के वक्तव्यों की शर्तों के अनुकूल हो। अलबत्ता हम स्वयं अनुसूचित जातियों को महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक मानते हैं जिनका प्रतिनिधित्व अल्पसंख्यक सलाहकार समिति में होना चाहिए। परंतु जो घोषणा आप चाहते हैं, वह अनुसूचित जातियों तक
ऽ डॉक्टर अम्बेडकर ने 1 जुलाई के अपने पत्र में लिखा ‘‘जहां कहीं भी भारत में प्राथमिक चुनाव आयोजित
किए गए, इन चुनावों के परिणामों ने यह सिद्ध किया कि फेडरेशन ने जिन उम्मीदवारों को चुनाव मैदान
में उतारा था, उनकी स्थिति सर्वोच्च रही और जिन उम्मीदवारों को कांग्रेस ने चुनाव में खड़ा किया था,
वे सबसे निचले स्थान पर रहें।’’
एल.पी. एंड जे/10/50 एफ 81 @ ये इस प्रकार थे-
(1) स्पष्ट शब्दों में घोषणा कि महामहिम की सरकार का विचार है कि केबिनेट मिशन के वक्तव्य के
पैरा 20 के अर्थ में अनुसूचित जातियां अल्पसंख्यक वर्ग हैं।
(2) महामहिम की सरकार इस बात पर ध्यान देगी कि ऐसे संरक्षण अनुसूचित जातियों को उपलब्ध
कराएं जाएं जिनसे अनुसूचित जातियां बहुसंख्यक वर्ग से भय-रहित होकर जीवनयापन कर सकें और
यह स्थिति इस समझौते से पूर्व होनी चाहिए जिस पर प्रभुसत्ता के हस्तांतरण के लिए संधि-पत्र
पर हस्ताक्षर किए जाएं।
(3) अंतरिम सरकार में कम से कम दो सदस्य अनुसूचित जातियों के होने चाहिए तथा इन सदस्यों का
नामांकन अनुसूचित जातियों के फेडरेशन द्वारा किया जाना चाहिए।
वही, एफ 82