112 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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ऽडॉक्टर अम्बेडकर का श्री एटली को पत्र
एल/पी एंड जे/10/50ःएफ55
दादर, बम्बई 14
12 अगस्त, 1946
प्रिय श्री एटली,
आपके 1 अगस्त, 1946 के पत्र के लिए धन्यवाद। मुझे यह आशा नहीं थी कि आप समय निकालकर मेरे 1 जुलाई, 1946 के पत्र का उत्तर देंगे। अतः मैं आपका कृतज्ञ हूं कि आपने समय निकाला ताकि मैं इन मुद्दों पर आपके विचारों से अवगत हो सकूं जो मैंने अपने पत्र में उठाए थे।
मुझे आशंका है कि मैं आपके उस विचार को स्वीकार नहीं कर सकता कि 1945 में शिमला सम्मेलन के बाद महामहिम की सरकार द्वारा अपनाई गई नीति में संशोधन किया जाना उचित है और न मैं मिशन के उस तरीके का समर्थन करता हूं जो अनुसूचित जातियों के लिए अपनाया गया है। मैं यह कहे बिना नहीं रह सकता कि हाऊस अॅाफ कामन्स में श्री एलेक्जेंडर का यह वक्तव्य बहुत बेदर्द वक्तव्य है अधिकांश अनुसूचित जातियां कांग्रेस के साथ है क्योंकि इस वक्तव्य में कोई सत्यता नहीं है। यह केवल मेरा ही मत नहीं है अपितु यदि आप केवल सर एडवर्ड बेनथाल से परामर्श करें, जो इस समय इंग्लैंड में है, मेरी धारणा है कि वे मेरा समर्थन करेंगे।
जहां तक आपके विश्लेषण का संबंध है, आपने प्राथ्मिक चुनाव में फेडरेशन की उपलब्धियों का परिणाम दिया है। मैं केवल इतना ही कहूंगा कि आपने इसको गलत समझा है और मुझे यह कहना पड़ता है कि बाहर का कोई भी व्यक्ति जो तथ्यों के महत्व को न जानता हो अथवा चुनाव के तरीके को न समझता हो, वह भी स्पष्टीकरण के बिना ही यह समझ सकता है कि वे तथ्य क्या कह रहे है। मिशन के विरूद्ध मेरे आरोप का मुख्य आधार यह है कि जब कांग्रेस ने तस्वीर का दूसरा
ऽ द ट्रांसफर ऑफ पॉवर, खंड 7, संख्या 142, पृष्ठ 221-23