23. डॉ. अम्बेडकर का श्री एटली को पत्र - Page 128

सत्ता हस्तान्तरण संबंधी महत्वपूर्ण पत्र-व्यवहार

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पहलू प्रस्तुत किया तब उसका कर्त्तव्य था कि मुझे बुला लेते और मुझसे व्याख्या करा लेते। मिशन ने ऐसा नहीं किया जब कि उसे न्याय के अनुरूप ऐसा करना चाहिए था। यदि मैं संतोषजनक व्याख्या प्रस्तुत करने में असफल हो जाता तो मिशन उस निष्कर्ष पर आ सकता था जो उसने निकाला है। मिशन को पूर्णतया गलतफहमी हुई है और यह बात मेरे चुनाव से सिद्ध होती है कि मुझे बंगाल से संविधान सभा के लिए चुना गया है। केबिनेट मिशन ने हाऊस ऑफ कामन्स में बताया कि मेरा प्रभाव बम्बई और सी.पी. तक ही सीमित है। फिर ऐसा क्यों हुआ कि मुझे बंगाल से चुना गया? मेरे अपने चुनाव के संबंध में तीन तथ्यों की ओर आपका ध्यान दिलाना चाहूंगा। एक बात यह है कि मैं केवल चुनाव ही नहीं जीता, अपितु मैं चुनाव में सर्वोत्तम स्थान प्राप्त कर सका जबकि कांग्रेस पार्टी के सर्वोच्च बंगाली नेता श्री शरत चन्द्र बोस भी हार गये। दूसरे, मैं किसी भी प्रकार से बंगाल की अनुसूचित जातियों के समुदाय के साथ साम्प्रदायिक बंधनों से संबंधित नहीं हूं। वे अलग जाति के हैं, जिस जाति का मैं नहीं हूं। वास्तव में मेरी जाति के लोग बंगाल में नहीं रहते, फिर भी बंगाल की अनुसूचित जातियों के लोगों ने मेरा समर्थन किया और यह समर्थन इतना अधिक था कि मैं सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर सका। तीसरे, बंगाल की अनुसूचित जातियां कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुई, परंतु उन्होंने अपनी पार्टी के वे नियम तोड़ दिए जिनके अनुसार उन्हें कांग्रेस के लोगों को ही अपने मत देने थे जबकि उन्होंने मुझे मत दिए। क्या इससे यह सिद्ध होता है कि बंगाल में मेरे अनुयायी नहीं थे? मुझे विश्वास है कि यदि केबिनेट मिशन अपने निष्कर्ष में ईमानदार है तो उसे अपने उस गलत मत का संशोधन करना चाहिए जो हाऊस ऑफ कॉमन्स में व्यक्त किया गया तथा अपना विचार बदल कर फेडरेशन को समुचित मान्यता प्रदान करनी चाहिए।

  1. जहां तक अल्पसंख्यक सलाहकार समिति में अनुसूचित जातियों की स्थिति का संबंध है, मुझे यह आश्वासन पाकर प्रसन्नता है कि ब्रिटिश मंत्रिमंडल अनूसूचित जातियों को महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक वर्ग मानता है। परंतु फिर भी मैं यह बात दुहराना चाहता हूं कि जब तक केबिनेट मिशन सार्वजनिक घोषणा नहीं करता तब तक इस विचार से अनुसूचित जातियों को सहायता नहीं मिलेगी। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं, जैसा कि आप देखेंगे, कि मौलाना अबुल कलाम आजाद ने कांग्रेस की ओर से वायसराय को विचार-विमर्श के समाप्त होने से पूर्व अपने अंतिम पत्र में लिखा था और जोरदार शब्दों में इस विचार को चुनौती दी थी कि अनुसूचित जातियां अल्पसंख्यक वर्ग की हैं। अनुसूचित जातियों को इस बात का भय है कि यदि यह विचार समय रहते ब्रिटिश मंत्रिमंडल द्वारा ठीक नहीं किया जाता है तो अनुसूचित जातियों के मामले पर उस सलाहकार समिति में विचार नहीं किया जाएगा जो कांग्रेस के सदस्यों से भरी