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ऽलॉर्ड पेथिक-लारेंस का श्री एटली को पत्र
एल/पी एंड जे/10/50ः एफ.एफ. 38-40
इंडिया ऑफिस 3 सितम्बर, 1946
सेक्रेटरी ऑफ स्टेट्स मिनटः क्रम सं. 48/46
प्रधान मंत्री,
आपने मुझे अम्बेडकर के उस पत्र पर विचार व्यक्त करने के लिए कहा है जो उन्होंने 12 अगस्त को आपको लिखा था। [@]
जहां तक उनके दूसरे पैरा का संबंध है, आप उस ज्ञापन में दलित वर्गो के चुनाव परिणामों का विश्लेषण देखेंगे जिसे मेरे निजी सचिव ने अम्बेडकर के पत्र के उत्तर में मसौदे के साथ 26 जुलाई [+] को भेजा है। सारांश में, तथ्य इस प्रकार हैं कि प्राथमिक चुनाव लड़े गए और उन चुनावों में कांग्रेस ने अम्बेडकर के संगठन से कहीं अधिक मत प्राप्त किए जबकि उन स्वतंत्र उम्मीदवारों को अनुपात में और भी अधिक मत मिले जो अम्बेडकर के समर्थक हो भी सकते हैं और नहीं भी हो सकते हैं। किन्तु इसके अलावा, दो-तिहाई सीटें कांग्रेस ने निर्विरोध जीत ली। अलबत्ता ये आंकड़े अंतिम नहीं हैं, परंतु यह कहना संगत नहीं है कि कॉमन्स में प्रथम लॉर्ड के वक्तव्य में ‘‘सत्य का आधार नहीं है’’ यद्यपि मेरा विचार है कि यह कुछ ज्यादा ही निश्चयात्मक था।
अम्बेडकर के पत्र के पैरा 3 के संबंध में यह बात हाऊस ऑफ कामन्स में नहीं कही गई थी कि उनका प्रभाव बम्बई और मध्य प्रांत तक ही सीमित है। वह बोर्ड ऑफ ट्रेड के अध्यक्ष के भाषण का संदर्भ दे रहे हैं जिसमें वास्तविक शब्द इस प्रकार थेः ‘‘डाक्टर अम्बेडकर का संगठन कुछ स्थानीय प्रकृति का है (कांग्रेस संगठन की अपेक्षा) और यह संगठन मुख्यतया बम्बई और मध्य प्रांत तक सीमित है।’’ मैंने इस बात की जांच की है कि बंगाल में संविधान सभा के चुनाव में क्या
ऽ ट्रांसफर ऑफ पॉवर, खंड 8, संख्या 250, पृष्ठ 411-12
@ संख्या 142
$ एल.पी.एंड जे/10/50 एफ 63-9