24. लार्ड पेथिक-लारेंस का श्री एटली को पत्र - Page 131

116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

हुआ जो अलबत्ता सानुपातिक प्रतिनिधित्व पर आधारित है। अम्बेडकर को पांच प्रथम वरीयता मत प्राप्त हुए। शरद चन्द्र बोस को भी पांच प्रथम वरीयता मत प्राप्त हुए। बंगाल में चुनाव का कोटा चार मतों तक सीमित था। यह स्वाभाविक है कि कांग्रेस अपने मतदाताओं को इस प्रकार संगठित करेगी कि अपने उम्मीदवारों में से प्रत्येक उम्मीदवार को यथासंभव चार प्रथम वरीयता मत मिल सकें। ‘‘मतदान में सर्वोच्च’’ जैसे शब्दों का महत्व सानुपातिक चुनाव में नहीं होता है। इसे कोई भी नहीं नकारता कि अम्बेडकर को भी बंगाल के दलित वर्गों में प्रभाव प्राप्त था। बंगाल विधान सभा में अनुसूचित जातियों के पच्चीस सदस्य हैं, इनमें से चार सदस्य स्वतंत्र सदस्यों के रूप में चुन लिए गए और एक अम्बेडकर का उम्मीदवार चुना गया। मैं यह नहीं जानता कि क्या सभी स्वतंत्र उम्मीदवारों ने संविधान सभा के चुनाव में अम्बेडकर को मत दिए थे अथवा क्या उन्हें कुछ एंग्लो-इंडियन मत प्राप्त हुए थे।

  1. अम्बेडकर के पैरा 4 के संबंध में, मुझे विश्वास है कि हम सार्वजनिक घोषणा नहीं कर सकते कि हम अनुसूचित जातियों को अल्पसंख्यक वर्ग मानते हैं और इस अल्पसंख्यक वर्ग को अल्पसंख्यक सलाहकार समिति में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। यही सही है कि कांग्रेस उन्हें अलग राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए अल्पसंख्यक वर्ग नहीं मानती जबकि हमने सदैव उन्हें अल्पसंख्यक वर्ग समझा है। परंतु हम ऐसी स्थिति में नहीं हैं कि यह सुनिश्चित कर सकें कि अम्बेडकर के संगठन का अल्पसंख्यकों की सलाहकार समिति में प्रतिनिधित्व हो।

  2. मैं यह नहीं समझता कि वास्तव में अम्बेडकर के पत्र का उत्तर भेजना चाहिए, परंतु यदि आप इसे सद्भावनापूर्ण मानें तो आप उत्तर भेज सकते हैं, जिसके लिए मैं एक छोटा मसौदाऽ भेज रहा हूं। मैं प्रथम लॉर्ड और बोर्ड ऑफ ट्रेड के अध्यक्ष के भाषण के उद्धरण [@] भेज रहा हूं जो कामन्स की बहस में उन्होंने दिए थे। मेरे अपने भाषण का एक अंश उसी प्रकार का था, परंतु वह संक्षिप्त था।

पेथिक लारेंस

ऽ मुद्रित नहीं हुआ। ऐसा नहीं लगता कि श्री एटली ने डॉ. अम्बेडकर के पत्र का उत्तर दिया। @ मुद्रित नहीं हुआ।