1. अनुसूचित जातियों (अछूतों) पर प्रभाव डालने वाले भारत के संवैधानिक परिवर्तनों के विषय में मंत्रिमंडलीय शिष्टमंडल (केबिनेट मिशन) के प्रस्तावों की डॉ .बी.आर. अम्बेडकर द्वारा समीक्षा - Page 138

वक्तव्य

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प्रथम अनूसूचित जातियों जैसे दलों पर, जिन्होंने ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग किया था, उसी कारण से लोगों का विश्वास नहीं था। दूसरे, आजाद हिन्द फौज के लोगों के अभियोग का, जो चुनाव के समक्ष ही चला था, कांग्रेस को लाभ पहुंचा और दूसरे दलों को हानि हुई। यदि आजाद हिन्द फौज पर अभियोग चुनाव के समय न चला होता तो कांग्रेस की पूर्णतया हार होती, क्योंकि उसकी साख बहुत निम्न थी।

इन दो कारणों के अलावा, चुनाव के परिणाम परीक्षण के रूप में क्यों नहीं लिए जाने चाहिए थे इसका एक विशेष कारण यह है कि उसे इस बात का आधार नहीं माना जाना चाहिए कि कांग्रेस अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व करती है या नहीं। वह कारण यह है कि अनुसूचित जातियों की सीटों के लिए अंतिम निर्णय संयुक्त निर्णायक प्रणाली द्वारा होता है जिसमें हिन्दू भी वोट (मत) देते हैं। चूंकि हिन्दुओं के वोट की प्रधानता होती है, अतः कांग्रेस के लिए अनुसूचित जातियों से संबंधित अपने उन उम्मीदवारों को पूर्णतया हिन्दू वोटों द्वारा चुनाव कर लेना आसान होता है जो अनुसूचित जाति की सीटों के लिए खड़े हैं। यह बात कि विधानमंडलों में अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधि जो कांग्रेस के टिकट पर खड़े हुए थे, वे मात्र हिन्दू वोटों द्वारा चुने गए, अनुसूचित जातियों के वोटों द्वारा नहीं। यह एक तथ्य हैं जिसे मंत्रीमंडलीय आयोग भी नकार नहीं सकेगा। कांग्रेस अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व करती है या नहीं इस बात का निर्णय करने की वास्तविक जांच प्राथमिक चुनावों के परिणामों को देखकर की जा सकती है जो अंतिम चुनावों से पहले हुए थे, क्योंकि प्राथमिक चुनावों में अनुसूचित जातियों का पृथक निर्वाचन-मंडल है जिसमें हिन्दुओं को मत देने का कोई अधिकार नहीं है। अतएव प्राथमिक चुनाव अनुसूचित जातियों की वास्तविक भावनाओं को प्रतिबिंबित करते हैं। प्राथमिक चुनाव के परिणाम क्या दर्शाते हैं? क्या वे यह दर्शाते हैं कि अनुसूचित जातियां कांग्रेस के साथ हैं?

अनुसूचित जातियों को प्रांतीय विधानमंडलों की 151 सीटें आवंटित की गर्ह हैं। वे, सिंध तथा उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत को छोड़कर, विभिन्न प्रांतों में वितरित हैं।

प्राथमिक चुनाव अनिवार्य नहीं होता है। यह केवल तभी अनिवार्य होता है, जब एक सीट के लिए यदि चार से अधिक उम्मीदवार लड़ रहे हों।

विगत प्राथमिक चुनावों में, जो अंतिम चुनाव से पहले हुए, प्राथमिक चुनाव 151 में से 40 निर्वाचन क्षेत्रों में अनिवार्य हो गया था। सीटें निम्न प्रकार से वितरित थीं-