1. अनुसूचित जातियों (अछूतों) पर प्रभाव डालने वाले भारत के संवैधानिक परिवर्तनों के विषय में मंत्रिमंडलीय शिष्टमंडल (केबिनेट मिशन) के प्रस्तावों की डॉ .बी.आर. अम्बेडकर द्वारा समीक्षा - Page 139

124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

मद्रास 10

बम्बई 3

बंगाल 12

संयुक्त प्रांत 3

मध्य प्रांत 5

पंजाब 7

बिहार तथा उड़ीसा के प्रांतों में कोई प्राथमिक चुनाव नहीं हुए। 40 निर्वाचन मंडलों में प्राथमिक चुनावों के परिणामों को परिशिष्ट में तालिकाबद्ध किया गया है जो इस नोट के साथ संबद्ध है। परिणाम यह सिद्ध करते हैं-

(1) कि 283 उम्मीदवारों में से कांग्रेस ने अपने टिकट पर (तालिका

1 देखें) केवल 46 उम्मीदवार खड़े किए और 168 सफल उम्मीदवारों

में से उसके पक्ष वाले केवल 38 उम्मीदवार सफल हुए (देखें तालिका

V )

(2) प्राथमिक चुनाव में किसी पार्टी के प्रवेश करने का उद्देश्य अपनी पार्टी

के टिकट पर कम से कम चार उम्मीदवारों को खड़ा करके अंतिम चुनाव

से सभी प्रतिद्वन्द्वी दलों को बाहर करना होता है। एक दल अपने टिकट पर

चार उम्मीदवार खड़े कर सकता है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता

है कि अपने मतदाताओं पर अपनी पार्टी के टिकट के पक्ष में मत देने के

संबंध में उसका कितना विश्वास है। कांग्रेस ने प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र में एक

से अधिक उम्मीदवार खड़ा करने का साहस नहीं किया। हमें इससे पता

चलता है कि कांग्रेस को यह विश्वास नहीं था कि अनुसूचित जातियों के

मतदाता उसके उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करेंगे। यदि ऐसा कोई दल

है जिसने उस प्रत्येक सीट के लिए जिस पर उसने चुनाव लड़ा है चार

उम्मीदवार खड़े किए हैं, तो वह दल ‘अनुसूचित जाति संघ’ (शिड्यूल्ड

कास्ट फेडरेशन) है। (देखें तालिका II, भाग I और V, कॉलम 3 तथा

4)

(3) कांग्रेस के पक्ष में जो मत पड़े हैं, यदि उनको मापा जाय तो यह बात

निर्विवाद रूप में सिद्ध होती है कि कांग्रेस ने प्राथमिक चुनावों में डाले गए

मतों के केवल 28 प्रतिशत मत प्राप्त किए। (देखें, तालिका IV )।

(4) यदि किसी व्यक्ति को हिन्दू मतों की सहायता से अंतिम चुनाव में

निर्वाचित होने का प्रलोभन न हो, तो समस्त स्वतंत्र उम्मीदवार अनुसूचित