1. अनुसूचित जातियों (अछूतों) पर प्रभाव डालने वाले भारत के संवैधानिक परिवर्तनों के विषय में मंत्रिमंडलीय शिष्टमंडल (केबिनेट मिशन) के प्रस्तावों की डॉ .बी.आर. अम्बेडकर द्वारा समीक्षा - Page 140

वक्तव्य

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जाति संघ के हो जाएंगे। उस मान्यता के आधार पर अनुसूचित जाति संघ ही केवल एकमात्र ऐसा दल है जो अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व करता है और गैर-कांग्रेस दलों के पक्ष में पड़े 72 प्रतिशत मतों को उसके पक्ष में दिखाया जाना चाहिए। (देखें, तालिका IV )।

मंत्रिमंडलीय आयोग के सदस्यों ने यह तर्क दिया कि डा. अम्बेडकर के अनुयायी केवल बम्बई प्रेसिडेंसी तथा मध्य प्रांत (सेन्ट्रल प्रोविसेंज) में अनुसूचित जातियों तक ही सीमित था।

इस बयान का कोई आधार नहीं है। अनुसूचित जाति संघ अन्य प्रांतों में भी काम कर रहा है और इसने वहां भी चुनाव में बम्बई तथा मध्य प्रांत की भांति ही बड़ी उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। यह बयान देते समय आयोग डा. अम्बेडकर की संविधान सभा में प्राप्त जीत को ध्यान में रखने में असफल रहा है। वह एक उम्मीदवार के रूप में बंगाल प्रांत की विधान सभा से खड़े हुए थे। उन्होंने प्रथम वरीयता के 7 मत प्राप्त किए, और जहां तक सामान्य सीटों का संबध है, चुनाव में शीर्ष पर रहे, और कांग्रेस पार्टी के नेता, श्री शरत चन्द्र बोस को भी पराजित किया। यदि डा. अम्बेडकर का बम्बई तथा मध्य प्रांतों के बाहर कोई प्रभाव नहीं है तो वह बंगाल से किस प्रकार चुने गए? इसके अलावा यह बात भी याद रखनी चाहिए कि बंगाल की प्रांतीय विधान सभा में अनुसूचित जातियों के लिए 30 सीटें हैं। इन 30 में से 28 पर कांग्रेस के टिकट पर उम्मीदवार चुने गए शेष दो में से जो उसकी पार्टी से संबंधित हैं, एक उम्मीदवार चुनाव के दिन बीमार हो गया। इसका अभिप्राय यह है कि कांग्रेस के टिकट पर चुने गए, अनुसूचित जाति के 6 सदस्यों ने कांग्रेस के आदेश को तोड़ा और डा. अम्बेडकर के पक्ष में मतदान किया। इससे यह पता चलता है कि अनुसूचित जातियों के वे सदस्य भी जो कांग्रेस के टिकट पर चुने गए हैं और कांग्रेस से संबंधित हैं, उन्हें अनुसूचित जातियों के नेता के रूप में मानते हैं। यह बात आयोग द्वारा दिए गए बयान का पूर्ण खंडन है।

आयोग के आत्मकसमर्पण से कांग्रेस को इतना अधिक प्रोत्साहन मिला है कि आयोग को सम्बोधित एक पत्र में कांग्रेस ने इस बात से इनकार किया है कि अनुसूचित जाति एक अल्पसंख्यक वर्ग है। इसका अर्थ यह है कि कांग्रेस अनुसूचित जातियों को वही सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार नहीं है जो अन्य अल्पसंख्यक वर्गो को वह देगी। आयोग ने कांग्रेस के इस सुझाव का खंडन नहीं किया है। पर इसमें एक बड़ा

खतरा छिपा है और यह आवश्यक है कि वाद-विवाद के दौरान आयोग को यह बात