1. अनुसूचित जातियों (अछूतों) पर प्रभाव डालने वाले भारत के संवैधानिक परिवर्तनों के विषय में मंत्रिमंडलीय शिष्टमंडल (केबिनेट मिशन) के प्रस्तावों की डॉ .बी.आर. अम्बेडकर द्वारा समीक्षा - Page 141

126 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

बताई जाए और उन्हें यह स्पष्ट घोषित करने के लिए बाध्य किया कि वे अनुसूचित जातियों को अल्पसंख्यक मानते हैं या नहीं।

मंत्रीमंडलीय आयोग ने अपने प्रस्तावों में कहा है कि प्रभुसत्ता को स्थानांतरित किए जाने से पहले, संसद को स्वयं को इस बात से संतुष्ट करना पड़ेगा कि अल्पसंख्यक वर्गो के लिए सुरक्षा के उपाय पर्याप्त हैं। आयोग ने कहीं भी सुरक्षा के उपायों की जांच करने वाले तंत्र को निर्धारित नहीं किया है। अल्पसंख्यक वर्गों की सुरक्षा के उपायों की जांच करने के लिए संसद के दोनों सदनों की एक संयुक्त समिति होगी यह स्पष्ट नहीं किया गया है। आयोग ने यह भी नहीं कहा है कि सुरक्षा पर्याप्त है या नहीं, इस विषय में निष्कर्ष निकालने के लिए महामहिम की सरकार अपना स्वतंत्र नियम करेगी। इन मामलों को निर्धारित करना आवश्यक है क्योंकि यह व्यवस्था आयोग के साथ बाद में विचार करके दी गई थी और यह उनके मूल प्रस्तावों में नहीं थी। यह इस बात का संकेत देती है कि इसका उद्देश्य केवल अल्पसंख्यक वर्गो के लिए एक घूस के रूप में कार्य करना था।