138 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
अछूत शिकायत कर रहे हैं।
- इस प्रकार, मंत्रिमंडलीय आयोग के प्रस्तावों की असमानता इस तथ्य में निहित है कि यह अछूतों को भारत के राष्ट्रीय जीवन में एक पृथक घटक के रूप में मान्यता देने की नीति से अलग हट गया है और उनको पृथक मान्यता न देकर उनके साथ भेदभाव करता है जबकि मुसलमानों तथा सिखों को पृथक वर्ग के रूप में मान्यता देता है।
महामहिम की सरकार द्वारा अछूतों को दिए गए वचनों को मंत्रिमंडलीय आयोग के निर्णय किस प्रकार रद्द कर देते हैं?
- मंत्रिमंडलीय आयोग द्वारा अछूतों को एक पृथक घटक के रूप में मान्यता न देना उनको ब्रिटिश सरकार द्वारा तथा उसकी ओर से दिए गए वचनों के प्रतिकूल है। उनमें से कुछ उल्लेखनीय वचन नीचे दिए जा रहे हैंः-
( i ) ‘‘भारत की एकता के हित में, किसी संवैधानिक योजना में भारतीय रियासतों के शामिल करने की अनिवार्य आवश्यकता को हमें भूलना नहीं चाहिए।
मैं उनमें से केवल दो का-मुस्लिम अल्पसंख्यक तथा अनुसूचित जातियों का उल्लेख करना चाहता हूं। अल्पसंख्यकों को विगत समय में दी गई कुछ गारंटियों हैं_ यह तथ्य है कि उनकी स्थिति की रक्षा की जानी चाहिए और उनको दी गई गारंटियों का सम्मान किया जाना चाहिए।’’
-लार्ड लिनलिथगो द्वारा 10 जनवरी, 1940 को ओरिएंट क्लब, बम्बई में दिए गए भाषण से उद्धरण।
( ii ) ‘‘ये दो मुख्य बातें हैं जो प्रकट हुई हैं। इन दो बातों के संबंध में महामहिम की सरकार अब मुझसे यह चाहती है कि मैं उनकी स्थिति को स्पष्ट करूं। पहली बात किसी संवैधानिक योजना के परिप्रेक्ष्य में अल्पसंख्यकों की स्थिति के संबंध में हैं...........। यह कहने की आवश्यकता नहीं कि वह (महामहिम की सरकार) भारत की शांति तथा कल्याण के लिए अपने उत्तरदायित्व को किसी ऐसी शासन प्रणाली को हस्तांतरित करने का विचार नहीं कर सकती जिसके प्राधिकार व सत्ता को भारत के राष्ट्रीय जीवन में बड़े तथा शक्तिशाली घटकों द्वारा प्रत्यक्ष रूप में स्वीकार करने से इंकार कर दिया जाए, वह ऐसी सरकार के प्रति समर्पण करने के लिए भी ऐसे घटकों पर जबरदस्ती भी नहीं कर सकती।’’
-लार्ड लिनलिथगो द्वारा 8 अगस्त, 1940 को दिये गये भाषण से उद्धरण।
‘‘कांग्रेस नेताओं ने........... एक असाधारण संगठन, भारत में एक सबसे कुशल