2. मंत्रिमंडलीय शिष्टमंडल तथा अछूत - Page 155

140 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

-लार्ड वेवल द्वारा श्री गांधी को 15 अगस्त, 1944 को लिखे गए पत्र से उद्धरण।

  1. अछूतों को पृथक प्रतिनिधित्व न देने का मंत्रिमंडलीय आयोग का प्रस्ताव, संबंधित तथ्यों के ईमानदारी से परीक्षण करने के बाद उसका व्यक्तिगत व ईमानदार निर्णय पर पहुंचने का परिणाम नहीं था। इसके विपरीत, आयोग ने जो कुछ किया है वह श्री गांधी के पूर्वाग्रह का समर्थन करा है। श्री गांधी, अछूतों को भारत के राष्ट्रीय जीवन में एक पृथक घटक के रूप में मान्यता देने के प्रबल विरोधी हैं। उन्होंने गोलमेज सम्मेलन में उनको पृथक मान्यता देने का विरोध किया। जब उन्हें यह पता चला कि उनके विरोध के बावजूद भी उनको श्री रेमजे मैक्डोनल्ड के साम्प्रदायिक परिनिर्णय द्वारा एक पृथक घटक के रूप में मान्यता दे दी गई है, तो उन्होंने धमकी दी कि यदि अछूतों की पृथक मान्यता को वापिस न लिया गया तो आमरण अनशन कर दूंगा। फिर 1945 में प्रथम शिमला सम्मेलन में श्री गांधी ने जब यह देखा कि महामहिम की सरकार ने अछूतों को पृथक मान्यता दे दी है, तो उन्होंने उसका विरोध किया। मंत्रिमंडलीय आयोग अपने प्रस्तावों को सफल बनाने के लिए उत्सुक था। ऐसा उस समय तक संभव नहीं था जब तक उसको श्री गांधी की स्वीकृति न मिलती। श्री गांधी ने अपनी कीमत मांगी और आयोग ने वह दे दी। वह कीमत थी अछूतों के पृथक राजनीतिक अस्तित्व का बलिदान करना। वास्तव में, इससे भी आगे जाकर यह कहा जा सकता है कि मंत्रिमंडलीय आयोग के प्रस्तावों का जहां तक अल्पसंख्यक वर्गो से संबंध है, वे श्री गांधी के सूत्र का ही प्रतिरूप थे और कुछ नहीं, जिसके संबंध में उन्होंने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में चर्चा की थी। श्री गांधी ने कहा कि राजनीतिक उद्देश्य के लिए वह केवल तीन समुदायों/सम्प्रदायों (1) हिन्दू, (2) मुसलमान तथा (3) सिखों को ही मान्यता देंगे। आयोग का सूत्र श्री गांधी के सूत्र की ही मात्र प्रतिलिपि है। इसका और अन्य स्पष्टीकरण नहीं है।
III

मंत्रिमंडलीय आयोग द्वारा अपने निर्णय के औचित्य में बताए गए आधार

  1. अछूतों को एक पृथक घटक के रूप में न मानने के अपने निर्णय के औचित्य के लिए, मंत्रिमंडलीय आयोग ने प्रान्तीय विधान सभाओं के फरवरी, 1948 में हुए चुनावों के परिणामों पर निर्भर किया है। मंत्रिमंडलीय आयोग के प्रस्तावों पर संसद में 18 जुलाई, 1948 को हुए वादविवाद के दौरान, आयोग के सदस्यों ने निम्नलिखित बातें प्रस्तुत करने का प्रयास किया हैः-