प्रस्तावों की समीक्षा
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( i ) कि चुनाव में अछूतों के लिए आरक्षित सभी स्थानों को कांग्रेस ने जीता, इसलिए कांग्रेस अछूतों का प्रतिनिधित्व करती है। इस बात की दृष्टि में, अछूतों को पृथक प्रतिनिधित्व देने के लिए कोई औचित्य नहीं था।
( ii ) कि अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ का प्रभाव और मेरा अपना प्रभाव केवल बम्बई तथा मध्य प्रांत तक ही सीमित था।
इन आधारों की निरर्थकता
- ये नितांत असंगत तर्क हैं और निकट से तथा ईमानदारी से विचार करने पर ये खरे नहीं उतरेंगे। प्रारंभ में ही, मंत्रिमंडलीय आयोग ने कांग्रेस के प्रतिनिधि स्वरूप का मूल्यांकन करने के लिए चुनाव के परिणामों को एक आधार के रूप मं अपनाने की भारी गलती की है। ऐसा करने में, आयोग ने निम्नलिखित परिस्थितियों को ध्यान में नहीं रखाः-
( i ) हिन्दू मतदाता तमाम युद्ध काल के दौरान, पूर्णतया ब्रिटिश सरकार के विरोधी थे और यद्यपि उन्होंने युद्ध में काम किया, परंतु वह काम इच्छा से नहीं किया। कांग्रेस पार्टी, जो ब्रिटिश विरोधी थी और युद्ध-प्रयासों में असहयोगी रही थी, हिन्दू मतदाताओं की प्रीति-भाजन थी। अन्य दलों, विशेष रूप से अनुसूचित जातियों को चुनाव में इसलिए हानि हुई थी क्योंकि वे ब्रिटिश सरकार के समर्थक थे और युद्ध प्रयास में उन्होंने सहयोग किया था।
( ii ) चुनाव के लिए निर्धारित तारीख से ठीक पहले, वायसराय तथा कमांडर-इन चीफ ने आई.एन.ए के व्यक्तियों पर मुकदमा चलाया। कांग्रेस ने आई.एन.ए. के व्यक्तियों का पक्ष लिया और उसे चुनाव का मुद्दा बनाया। यह मुकदमा मुख्य कारक था जिसने कांग्रेस के प्रभाव को बढ़ाया, जिसकी अवनति हो रही थी।
( iii ) जिस मुद्दे पर चुनाव लड़ा गया, वह स्तवंत्रता तथा भारत छोड़ों था। भारत के भावी संविधान का स्वरूप कभी भी कोई मुद्दा नहीं था। यदि वह मुद्दा होता तो कांग्रेस को कभी भी वह बहुमत न मिलता जो उसने प्राप्त किया।
( iv ) मंत्रिमंडलीय आयोग ने रिटर्निंग अफसरों तथा पोलिंग अफसरों के, जो कि सवर्ण हिन्दू थे, कांग्रेस का विरोध करने वाले अनुसूचित जातियों के उम्मीदवारों के विरोधी रवैये को ध्यान में नहीं रखा। उन्होंने उनके नॉमिनेशन पेपर (नामजदगी पर्चे) अस्वीकार कर दिए और उनको मतपत्र जारी करने से इंकार कर दिया। मंत्रिमंडलीय आयोग ने आतंकवाद तथा धमकी की उस मात्रा को ध्यान में नहीं रखा जो अछूत मतदाताओं को सवर्ण हिन्दुओं द्वारा इस आधार पर दी गई क्योंकि वे कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मत देने के लिए तैयारी नहीं थे। आगरा शहर में अछूतों के 40 घर जला