142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
दिए गए। बम्बई में एक अछूत की हत्या कर दी गई और सैंकड़ों गांवों में मुफस्सल अछूत मतदाताओं को मतदान केन्द्रों तक नहीं जाने दिया गया। नागपुर में, एक पुलिस अधिकारी कांग्रेस का इतना अधिक हिमायती हो गया कि उसने दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) की अनुमति के बिना अछूत मतदाताओं को डराने के लिए अछूतों की एक भीड़ पर गोली चलाई। समस्त भारत में ऐसे असंख्य मामले हुए।
- यदि मंत्रिमंडलीय आयोग इन परिस्थितियों को ध्यान में रखता तो यह महसूस करता कि चुनावों में कांग्रेस को सफलता केवल लाभकारी परिस्थितियों के कारण मिली। ऐसी परिस्थितियों में हुए चुनावों के परिणामों को संविधान सभा में अछूतों को पृथक प्रतिनिधित्व न देने के लिए औचित्य के रूप में नहीं मानना चाहिए था।
आयोग ने अपने निर्णय के लिए एक गलत मापदंड को कैसे अपनाया
आयोग द्वारा यह निर्णय करने के लिए कि कांग्रेस अछूतों का प्रतिनिधित्व करती है या नहीं, तो मापदंड अपनाया गया वह यह था कि अंतिम चुनाव में कांग्रेस द्वारा अछूतों के लिए आरक्षित सीटों में से कितनी सीटें जीती गई। यह मापदंड एक झूठा व गलत मापदंड था क्योंकि अंतिम चुनावों के परिणाम, अछूतों के नियंत्रण से बाहर हैं। पूना पेक्ट के अधीन, चुनावों का निर्धारण हिन्दू मतों से होता है। आयोग द्व ारा जिस सच्चे मापदंड को अपनाया जाना चाहिए था वह इस बात का पता लगाना था कि अछूतों ने किस प्रकार मतदान किया, कांग्रेस के पक्ष में उनके द्वारा कितने मत डाले गए और कांग्रेस के विरोध में उनके कितने मत गए। इसका निर्णय केवल प्राथमिक चुनावों के परिणामों से किया जा सकता है अंतिम चुनावों के परिणामों से नहीं, क्योंकि प्राथमिक चुनाव में केवल अछूत ही मतदान करते हैं। यदि प्राथमिक चुनावों के परिणामों को आधार माना जाए तो मंत्रिमंडलीय आयोग का निर्णय हास्यास्पद व निरर्थक था और तथ्यों के प्रतिकूल था क्योंकि प्राथमिक चुनाव में पड़े केवल 28 प्रतिशत मत ही कांग्रेस के पक्ष में तथा 72 प्रतिशत विरोध में डाले गए थे।
यह कहा जाता है कि यदि अछूत यह महसूस करते थे कि वे कांग्रेस में नहीं हैं तो उन्हें अपने लिए आरक्षित 151 सीटों में से प्रत्येक सीट के लिए प्राथमिक चुनाव कराना चाहिए था। वास्तव में, प्राथमिक चुनाव समस्त भारत में केवल 43 सीटों के लिए थे। अछूतों ने शेष 108 सीटों के लिए प्राथमिक चुनाव के लिए जोर क्यों नहीं दिया? यह तर्क निम्नलिखित बातों के कारण निरर्थक हैंः-
( i ) प्राथमिक चुनाव अनिवार्य नहीं होता, यह केवल उसी स्थिति में अनिवार्य होता है जब एक सीट के लिए लड़ने वाले चार से अधिक उम्मीदवार हों। यह महसूस नहीं किया गया है कि जो व्यक्ति प्राथमिक चुनाव के लिए खड़ा होता है उसके