144 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
सभा से उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए। जहां तक सामान्य सीटों का संबंध है, चुनाव में वह सबसे ऊपर रहे और कांग्रेस पार्टी के नेता, शरत चन्द्र बोस को भी हरा दिया। यदि डा. अम्बेडकर का बम्बई तथा मध्य प्रांत से बाहर प्रभाव न होता, तो वह बंगाल से कैसे चुने जाते? इसके अतिरिक्त, यह भी याद रखना चाहिए कि प्रांतीय सभा में 30 सीट हैं। 30 में से 28 पर कांग्रेस टिकट वाले उम्मीदवार चुने गए। जो दो उम्मीदवार उनके दल के थे उनमें से एक चुनाव के दिन बीमार पड़ गया। फिर भी, डा. अम्बेडकर चुनाव में शीर्ष पर रहे। यदि बंगाल के अनुसूचित जाति सदस्य जो कांग्रेस के टिकट पर चुने गए थे, उनके पक्ष में मत न देते तो यह नहीं हो सकता था। यह भी याद रखना चाहिए कि बंगाल में अनुसूचित जातियों का संबंध उस समुदाय की जाति से नहीं है जिससे डा. अम्बेडकर संबंधित है। इससे यह पता चलता है कि अनुसूचित जातियों के वे सदस्य भी जिनका संबंध कांग्रेस से है, और जिनका संबंध उनके समुदाय/जाति से नहीं है, उन्हें अनुसूचित जातियों के नेता के रूप में मानते हैं। यह बात आयोग के सदस्यों द्वारा दिए गए बयान को असत्य प्रमाणित करती है।
- मंत्रिमंडलीय आयोग के सदस्यों ने तर्क दिया कि संविधान सभा के गठन में एकरूपता को बनाए रखने के लिए अछूतों के मामले में उनको अंतिम चुनावों के परिणामों को अपनाना पड़ा, जैसा कि वे अन्य समुदायों/जातियों के मामले में कर चुके थे। यह तर्क एक विशेष प्रकार की वकालत करने का रूप है जिसमें कोई दम नहीं है। आयोग जानता था कि सिखों, मुसलमानों तथा भारतीय ईसाइयों का अंतिम चुनाव, पृथक निर्वाचक मंडलों द्वारा हुआ था। अनुसूचित जातियों का अंतिम चुनाव, पृथम निर्वाचकों द्वारा नहीं हुआ था। फलतः, एकरूपता के लिए, आयोग को संविधान सभा में अछूतों को प्रतिनिधित्व देने के लिए प्राथमिक चुनावों के परिणाम को ध्यान में रखना चाहिए था। आयोग ऐसा करने के लिए बाध्य था क्योंकि वादविवाद में स्टेफोर्ड क्रिप्स ने यह स्वीकार किया था कि अछूतों के चुनाव की प्रणाली जो पूना समझौते द्वारा निर्धारित की गई थी, असमान थी। आयोग ने अपने निर्णय के लिए फिर उसे क्यों अपनाया?
IV
अछूतों को आसन्न खतरे से बचाने के लिए क्या किया जा सकता है?
- मंत्रिमंडलीय आयोग में संविधान सभा के गठन द्वारा अछूतों को पूर्णतया उन सवर्ण हिन्दुओं की दया पर छोड़ दिया है जिनका इसमें पूर्ण बहुमत है। अछूत यह चाहते हैं कि महामहिम की सरकार साम्प्रदायिक समझौते द्वारा उनको दिए गए पृथक निर्वाचन मंडल की पुनःव्यवस्था की जए तथा पूना पेक्ट का निराकरण किया जाए