1. राजनीतिक शिकायतें - Page 26

राजनीतिक शिकायतें

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इसकी सार्थकता बहुत कुछ नष्ट को गई तथा उनकी शिकायत दूर नहीं हुई। अनुसूचित जातियां यह महसूस करती हैं कि मंत्रिमंडल में उनका प्रतिनिधित्व बहुत अपर्याप्त है। 15 सदस्यों के मंत्रिमंडल में अनुसूचित जातियों का केवल एक सदस्य है जबकि मुसलमानों के 3 सदस्य हैं। विभिन्न समुदायों की आवश्यकताओं तथा उनकी संख्या की तुलना में उन्हें प्रदत्त प्रतिनिधित्व में भारी अंतर होने के कारण शिकायतें पैदा होती हैं। यदि जनसंख्या की कसौटी मानी जाती तो इसमें संदेह नहीं था कि जनसंख्या की दृष्टि से अनुसूचित जातियों के लोग मुसलमानों के बहुत निकट हैं। अतः यह कहना संगत होगा कि यदि 15 सदस्यों के मंत्रिमंडल में मुसलमानों के तीन सदस्य शामिल किए जाते हैं तो अनुसूचित जातियों के भी कम से कम दो सदस्य होने चाहिए। जैसी स्थिति है, उससे यह लगता हैं कि मंत्रिमंडल में सामुदायिक अनुपात के गठन में किसी नियम का पालन नहीं हुआ हैं। सिखों की संख्या कुछ लाखों में है जबकि अछूतों की संख्या 4 करोड़ है और दोनों को एक ही समान देखा जाता है।

  1. भारतीय राजनीति में अनुसूचित जातियों की स्थिति के अधिक स्थिरीकरण की आवश्यकता है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारतीय राजनीति में उनकी स्थिति को स्थिर करने का प्रभावकारी ढंग उन्हें मंत्रिमंडल में ऐसा प्रतिनिधित्व देना हैं जो उनकी संख्या और आवश्यकता की दृष्टि से उनकी मांग है। मुझे विश्वास है कि मैं यह बताने में कोई रहस्योद्घाटन नहीं कर रहा हूं कि सर स्टेफोर्ड क्रिप्स जब भारत आए थे तब मैंने उनसे साक्षात्कार किया था और उस समय उन्होंने मुझसे कहा था कि उनकी महामहिम सरकार का एक मुख्य उद्देश्य यह है कि उस केन्द्रीय कार्यपालिका में अनुसूचित जातियों की स्थिति को स्थिर किया जाए जिसका गठन आंतरिक अवस्था में किया जाना है ताकि संविधान सभा इस नई मांग के अनुसार मसौदा तैयार करे। मेरा निवेदन है जब कार्यकारिणी परिषद के भारतीयकरण की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा तो इस नीति को कार्यान्वित किया जाएगा।
3. लोक सेवाओं में प्रतिनिधित्व का अभाव
  1. अनुसूचित जातियों को लोक सेवाओं में उपयुक्त और पर्याप्त स्थान न देकर उनके साथ घोर अन्याय किया गया है। ज्ञापन के कार्यक्षेत्र की दृष्टि से मैं केवल उन सेवाओं के बारे में कहना चाहूंगा जिनका मुख्यतया केन्द्रीय सरकार से संबंध है। वे दो वर्गो में विभाजित की जा सकती हैः

(क) आई.सी.एस.

(ख) केन्द्रीय सेवाएं-