12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
( i ) ऐसी सेवाएं जिनकी भर्ती अखिल भारतीय आधार पर की जाती है, और
( ii ) ऐसी सेवाएं जिनकी भर्ती स्थानीय तौर पर की जाती है। 12. यदि कोई व्यक्ति इन सेवाओं में सामुदायिक अनुपात की जांच करे तो निस्संदेह यह कहा जा सकता है कि अनुसूचित जातियों को इन सेवाओं से काफी हद तक अलग रखा गया है। इन सेवाओं से अनुसूचित जातियों को अलग रखे जाने के विचार के बारे में मेरा अपना मत है। सर्वप्रथम, मैं उस स्थिति के बारे में कहना चाहूंगा जिसका संबंध भारतीय सिविल सेवा से है। आई.सी.एस. की समुदायवार स्थिति जैसी कि आजकल (1942) है, इस प्रकार हैः
आई.सी.एस. में समुदायवार स्थिति
समुदाय आई.सी.एस. की संख्या
यूरोपीय 488
हिन्दू 363
मुसलमान 109
भारतीय ईसाई 23
एंग्लो-इंडियन 9
पारसी 9
सिख 11
अनुसूचित जातियां 1
अन्य 43
कुल 1,056
1,056 आई.सी.एस. अधिकारियों में से एक अधिकारी अनुसूचित जातियों का है। यह है आई.सी.एस की स्थिति।
जहां तक अनुसूचित जातियों के व्यक्तियों की केन्द्रीय सेवाओं में भर्ती का प्रश्न है, यह स्थिति भी उतनी ही शोचनीय है। यह बिलकुल अनावश्यक है कि ऐसे तथ्यों से ज्ञापन को अधिक बोझिल बनाया जाए। भारत सरकार के गृह विभाग की ओर से इस मुद्दे से संबंधित स्थिति को स्वीकार किया गया है। गृह विभाग के अलग-अलग समुदायों की भर्ती से संबंधित उनके कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है-