1. राजनीतिक शिकायतें - Page 30

राजनीतिक शिकायतें

15

  1. इस संकल्प में ऐसा कौन सा उपबंध है जो अनुसूचित जातियों की स्थिति की सुरक्षा करता है? मैं आगे इस संकल्प के दो संगत उपबंधों का उल्लेख करूंगा। इस संकल्प के पैरा 3 में दिया गया है कि-

‘‘यदि उनके (दलित वर्गों के) लिए कुल मिलाकर हिन्दुओं के निमिन्त

उपलब्ध संख्या में से रिक्त स्थानों का निश्चित प्रतिशत आरक्षित किया जाए

तो किसी उपयोगी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी, परन्तु वे यह सुनिश्चित

करने की आशा करते हैं कि दलित वर्गों के योग्यताप्राप्त उम्मीदवारों को

नियुक्ति के उचित अवसरों से वंचित नहीं किया जाए।’’

जिस तरीके से सरकार ने अनुसूचित जातियों के लिए लोक संवाओं में प्रतिनिधित्व का समुचित भाग सुनिश्चित करने की आशा की वह स्थिति संकल्प के पैरा 7( i ) ( vi ) में विनिर्दिष्ट है, जो इस प्रकार है-

‘‘दलित वर्गों के लिए उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त करने हेतु इन वर्गों के

यथोचित योग्यता प्राप्त सदस्यों को लोक सेवा में नामांकित किया जा सकता

है चाहे उस सेवा में भर्ती प्रतियोगिता द्वारा ही क्यों न की जा रही हो।

इन प्रस्तावों के अवलोकन से आगे दिए गए दो तथ्य स्पष्ट होते हैं-

( i ) इस संकल्प में अनुसूचित जातियों को अल्पसंख्यक घोषित नहीं किया

गया है।

( ii ) इस संकल्प में वार्षिक रिक्त स्थानों के निर्धारित अनुपात को अनुसूचित

जातियों में आवंटित नहीं किया गया है।

कहने की आवश्यकता नहीं कि लोक सेवाओं में अनुसूचित जातियों तथा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की भर्ती कराने के लिए भारत सरकार द्वारा किए गए उपबंधों में आश्चर्यजनक वैषम्य है। इस वैषम्य को एक वाक्य में अभिव्यक्त किया जा सकता है। अन्य समुदायों की भर्ती इस संकल्प के कारण निश्चित है और इसमें कोई स्थान विवेक के प्रयोग का नहीं है। यह मामला दायित्व का बनाया गया है। भर्ती करने वाले अधिकारी को उस व्यक्ति के भर्ती करने से रिक्त स्थान भरना चाहिए जो ऐसे समुदाय का हो जिसके लिए स्थान आरक्षित किया गया हो। दूसरी ओर, अनुसूचित जातियों की भर्ती केवल विवेकाधीन मामला माना गया है। भर्ती करने वाला अधिकारी आरक्षित रिक्त स्थान को अनुसूचित जातियों के व्यक्ति की नियुक्ति करके भर सकता है। 19. यही अंतर जिसमें एक ओर कछ अल्पसंख्यक समुदायों के उम्मीदवारों की नियुक्ति का अनुपात सरकारी सेवाओं में अनिवार्य कर दिया गया है, किन्तु दूसरी ओर