1. राजनीतिक शिकायतें - Page 31

16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

अनुसूचित जातियों की नियुक्ति को विवेक पर छोड़ दिया गया है, वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेवार है। यही कारण है कि मुसलमानों और अन्य समुदायों को लोक सेवाओं में भली भांति प्रतिनिधित्व मिला है जबकि अनुसूचित जातियों को पूर्णतया छोड़ दिया गया है। इससे अधिक अच्छा परिणाम तब तक संभव नहीं है जब तक भारत सरकार लोक सेवाओं में अनुसूचित जातियों की भर्ती का मामला नियुक्त करने वाले अधिकारियों के विवेक पर रहने देगी। ये अधिकारी या तो यूरोपीय होते है या हिन्दू या मुसलमान। यूरोपीय तो अनुसूचित जातियों की स्थिति से अनभिज्ञ होता है और उसने अनुसूचित जातियों के हितों की रक्षा के लिए कभी भी विशेष चिंता प्रकट नहीं की है। जब तक उसके सामान्य अधिकार बने रहें, वह अपने हिंदू या मुसलमान अधीनस्थ कर्मचारियों के परामर्श का अनुसरण करने के लिए तैयार रहता है। मुसलमान, स्वाभाविक रूप से अपनी स्थिति को मजबूत बनाने के लिए अधिक प्रयत्नशील रहते हैं। उन्हें इस बात की चिंता रहती है कि यथासंभव अधिक से अधिक रिक्त स्थान मुसलमानों द्वारा भरे जाएं। किसी भी दशा में वे सभी स्थान मुसलमानों द्वारा भरे जाएं जो उनके लिए आरक्षित हैं। हिंदुओं का अभी तक लोक सेवा में एकाधिकार रहा है और वे कभी भी नहीं चाहते कि जीवन के अच्छे तत्वों में अन्य समुदाय के साथ सहयोगी हों। अपितु वे इस संतुलन को अपने तक ही सीमित रखना चाहते हैं। हिन्दू अनुसूचित जातियों के विरूद्ध हैं और बहुत समय से भेदभाव रखते हैं तथा अपने ही हितों को साध आते हैं। अतः हिन्दू अनुसूचित जातियों के लिए कभी भी न्यायसंगत नहीं होंगे। यह केवल भ्रम ही है कि अनुसूचित जातियों की भर्ती के प्रश्न को ऐसे अधिकारियों के विवेक पर छोड़ दिया जाए और यह आशा की जाए कि अनुसूचित जातियां इसके फलस्वरूप अपने प्रतिनिधित्व में उचित भाग प्राप्त कर सकेंगी।

  1. लोक सभा में प्रवेश का प्रश्न सभी अल्पसंख्यक समुदायों के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न है, परंतु अनुसूचित जातियों के लिए यह प्रश्न सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इस प्रश्न का संबंध उनके जीवन-परण से है। इसके अनेक कारण हैं कि ऐसा क्यों है। सर्वप्रथम, अनुसूचित जातियों के युवाओं के लिए आजीविका के साधन के दरवाजे

खोलने का प्रश्न है। यह इस प्रश्न का एक पक्ष है जिसे कि अनुसूचित जातियां और यहां तक कि भारत सरकार भी उपेक्षा नहीं कर सकती। व्यापार और उद्योग आजीविका के खुले साधन हैं, परंतु ये सब अनुसूचित जातियों के लिए बंद हैं। केवल सरकारी सेवा ही ऐसा साधन है जिससे वे अपनी आजीविका प्राप्त कर सकते हैं। यद्यपि यह एक महत्वपूर्ण पक्ष है, केवल यही एक ऐसा पक्ष नहीं है जो इस प्रश्न को इतना महत्वपूर्ण बना देता है। एक अन्य पक्ष भी है जो इसे महत्वपूर्ण बनाता है। इस पक्ष का संबंध उस प्रभाव से है जो सरकार के संरक्षण की उदारता से इस समुदाय