राजनीतिक शिकायतें
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की शिक्षा के प्रश्न पर पड़ेगा। हिन्दू समुदाय का मामला इसका द्योतक है। हिन्दू समुदाय ने तीव्रता से प्रगति की है जो स्पष्ट झलकती है। परंतु यह शायद ही महसूस किया जाता है कि इसका क्या कारण है कि शिक्षा की गहरी जड़े हिन्दू समाज में व्याप्त हैं। इसका कारण यह है कि शिक्षा से सरकारी सेवा में प्रवेश पाने के लिए आजीविका का दरवाजा खुल जाता है। आजीविका का इसी प्रकार का आश्वासन अनुसूचित जातियों के लिए भी आवश्यक है जो शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ी हुई हैं। ऊपर बताए गए दो तर्को से कहीं बड़ा एक तीसरा तर्क भी है। इसका संबंध इस बात से है कि अनुसूचित जातियों के सामान्य लोगों के हित अनुसूचित जातियों के शिक्षित लोगों के हितों से भिन्न हैं। यह बात इससे स्पष्ट होगी यदि यह महसूस किया जाए कि लोक प्रशासन का लोक कल्याण की दृष्टि से कितना महत्व है। सर्वप्रथम, आजकल प्रशासन की शक्ति में विधान बनाने की शक्ति निहित होती है। आधुनिक समय में कोई भी कानून न तो पूरा है, और न ही सुविस्तृत है। इनमें से अधिकांश कानून प्रशासन को वे नियम बनाने की शक्ति देते हैं जो अधिनियम के उद्देश्यों को प्रभावी बनाने के लिए बनाए जाते हैं। दूसरे, कानून की प्रभावोत्पादकता इस बात पर निर्भर करती है कि इसे किस प्रकार से कार्यान्वित किया जाता है। अतः अच्छे कानून की अपेक्षा अच्छे प्रशासन का कहीं अधिक महत्व है। कानून अच्छे सिद्ध नहीं हो सकते, यदि प्रशासन ठीक न हो। इसलिए प्रशासन का प्रश्न उन अनुसूचित जातियों के लिए अधिक महत्वपूर्ण है जो अच्छे नियमों की अपेक्षा अच्छे प्रशासन में रूचि रखती हैं। क्या वर्तमान प्रशासन अच्छा प्रशासन है? वर्तमान प्रशासन के बारे में अनुसूचित जातियां क्या सोचती हैं? इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि व्यापक रूप से यह अभिमत है कि भारत भर में अनुसूचित जातियों की ओर समग्र प्रशासन अपनी प्रवृत्ति में द्वेषपूर्ण, न्यायविहीन और विकृत है। वास्तव में अनुसूचित जातियों की पीड़ा और परेशानी उस विवेक से उत्पन्न होती है जो उन सभी मामलों में लोक सेवा अधिकारियों में निहित है जिन्हें अनुसूचित जातियों के विरूद्ध अपनाया जाता है जिनका उद्देश्य यह होता है कि अनुसूचित जातियों को नीचे रखा जाए। हिन्दू और मुसलमान अफसरों की मानसिकता को देखते हुए, अनुसूचित जातियों के प्रति भेदभाव होना निश्चित है। यह स्थिति उस समय तक बनी रहेगी जब तक कि प्रशासन अपने कर्मचारियों को ऐसे वर्गो से लेता रहेगा जो अनुसूचित जातियों के विरूद्ध हैं और जो उनके दमन में विश्वास रखते हैं। इससे अधिक कोई अन्य सशक्त तर्क नहीं हो सकता जो अनुसूचित जातियों की सामान्य जनसंख्या के लाभ और कल्याण के निमित्त हो और यह दिखाए कि लोक सेवा में अनुसूचित जातियों का प्रवेश सबसे सशक्त विचार समझा जाना चाहिए।