18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
- कुछ तथ्य संदेह से परे हैं। शरारत का स्रोत स्पष्ट है। अनुसूचित जातियों की सेवा में रूचि होना कितना महत्वपूर्ण है यह बात भी स्पष्ट है। इस बात में कोई विवाद नहीं कर सकता है कि अन्य समुदायों की तुलना में अनुसूचित जातियों के विरूद्ध 4 जुलाई, 1934 के सरकार के संकल्प में विभेद करके गंभीर शरारत की गई है। इससे अनुसूचित जातियों के लिए परिणाम कितने घातक सिद्ध हुए, यदि आई.सी.एस. में सांप्रदायिक अनुपात से संबंधित आगे दी गई तालिका में दर्शाया गया हैं-
तालिका 3
1942 में आई.सी.एस. में साम्प्रदायिक अनुपात समुदाय कुल यूरोपीय लोगों को यूरोपीय लोगों को
संख्या सम्मिलित करते हुए छोड़ते हुए 568 के
1056 के जोड़ का प्रतिशत जोड़ का प्रतिशत
- यूरोपीय 488 42.4 ---
- हिन्दू 363 34.4 63.2
- मुसलमान 109 10.3 19.2
- भारतीय ईसाई 23 2.2 4.0
- एंग्लो-इंडियन 9 .9 1.5
- पारसी 9 .9 1.5
- सिख 11 1.0 2.0
- अनुसूचित जातियां 1 00 00
- अन्य 43 3.9 8.0
जोड़ 1,056
तालिका 4
प्रतियोगिता और नामांकन द्वारा आई.सी.एस.
समुदाय प्रतियोगिता द्वारा नामांकन द्वारा जोड़
- यूरोपीय 336 152 488
- हिन्दू 332 31 363
- मुसलमान 35 74 109
- भारतीय ईसाई 19 4 23
- एंग्लो-इंडियन 8 1 9
- पारसी 8 1 9
- सिख 5 6 11
- अनुसूचित जातियां --- 1 1
- अन्य 28 15 43
जोड़ 771 228 1,056