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राजनीतिक शिकायतें

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इसका कारण यह है कि 4 जुलाई, 1934 के प्रस्ताव के अधीन यह निर्णय किया गया है कि यदि किसी समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित किया जाता है तो वह समुदाय लोक सेवाओं में आरक्षण का लाभ उठाने का अधिकारी हो जाता है, परंतु इस समुदाय को इस प्रकार का कोई लाभ नहीं मिल पाता। यह जानना कठिन है कि इस घोषणा में क्या आपत्ति हो सकती है कि अनुसूचित जातियों को अल्पसंख्यक माना जाए। अल्पसंख्यक शब्द राजनीतिक शब्द है और चाहे कानूनी परिभाषा कुछ भी क्यों न हो, इसकी वास्तविक परिभाषा के बारे में किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं किया जा सकता। यह मामला महामहिम की सरकार के सामुदायिक एवार्ड के अंतर्गत जाता है। अतः महामहिम की सरकार के सामुदायिक एवार्ड द्वारा कोई भी समुदाय उसकी परिधि में आता हो तो उसे अल्पसंख्यक माना जाता है। वास्तव में यही एक आधार है जिसके अनुसार भारत सरकार ने यह घोषित किया है कि मुसलमान, सिख भारतीय ईसाई और एंग्लो-इंडियन अल्पसंख्यक वर्ग के हैं। यदि ये समुदाय अल्पसंख्यक हैं, और अल्पसंख्यक इसलिए हैं कि वे सामुदायिक एवार्ड की परिधि में आते हैं, तो यह समझना कठिन है कि अनुसूचित जातियों को अल्पसंख्यक घोषित करने में किस प्रकार इनकार किया जा सकता है क्योंकि वे भी इसी एवार्ड की परिधि में आते हैं। दूसरे, यदि सरकार उन्हें अल्पसंख्यक घोषित करने के लिए बाध्य है तो यह स्वाभाविक फलस्वरूप स्थिति बनती है कि सरकार की सेवाओं में उनका भाग सुनिश्चित करने के लिए भी वह बाध्य है और उन्हीं साधनों तथा तरीकों से उनके भाग को उन्हें उपलब्ध कराना चाहिए जैसा कि अन्य समुदायों के भाग को उन्हें दिलाया गया है। कोई भी उस अनुपात का विरोध नहीं कर सकता जो अनुसूचित जातियों के वैध भाग के अनुसार उनका अधिकार है। यह स्पष्ट है कि ब्रिटिश इंडिया में उनकी जनसंख्या 13.6» है और वे अपने लिए सेवाओं में 13.6» भाग से अधिक की मांग नहीं कर रहे। यह स्थिति हिंदुओं के लिए अनिष्टकर नहीं है क्योंकि उनकी जनसंख्या 50» है और उन्हें 63» भाग प्राप्त है जो उनके भाग से 13» अधिक है।

  1. अनुसूचित जातियों के इस दावे का विरोध बड़े विचित्र और अप्रत्याशित स्रोतों से किया जाता है। यह विरोध हिन्दुओं द्वारा किया जाना चाहिए। परन्तु ऐसा नहीं हो सकता। अनुसूचित जातियों और हिन्दुओं के पारस्परिक अधिकारों की परिभाषा उस पूना पेक्ट में की गई है जिसे 1932 में बनाया गया था। वह एक ऐस समझौता है जिसके द्वारा हिन्दुओं ने स्वीकार किया है कि अनुसूचित जातियां अल्पसंख्यक हैं और उनका अधिकार है कि उन्हें देश की लोक सेवाओं में पर्याप्त भाग मिले। यह सत्य है कि शब्द ‘पर्याप्त’ को मात्रात्मक अभिव्यक्ति में नहीं दिया गया था। इसका कारण यह था कि इस पेक्ट को बहुत शीघ्रता में अपनाया गया था ताकि श्री गांधी को