राजनीतिक शिकायतें
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योग्यता वाले अनुसूचित जातियों के उम्मीदवारों में कमी हो जाती है, तो इसमें किसी को भी दुःख नहीं होगा क्योंकि अप्रयुक्त रिक्त स्थान हिंदुओं को दिए जाएंगे। गृह मंत्री द्वारा प्रत्याशित कठिनाई केवल अनुसूचित जातियों के मामले में ही नहीं कही जा सकती। अन्य अल्पसंख्यकों की दशा भी ऐसी ही कठिनाई से उत्पन्न स्थिति से मुक्त नहीं है। वास्तव में, जब सरकार ने 1934 में संकल्प जारी किया तो सरकार ने यह महसूस किया कि यह कठिनाई उनके मामले में भी उठ सकती है, परंतु इससे सरकार को उन्हें अल्पसंख्यक घोषित करने और उनके अनुपात को निर्धारित करने में कोई कठिनाई नहीं हुई। भारत सरकार ने उन्हें अल्पसंख्यक घोषित किया, उनका अनुपात भी निर्धारित किया, तथा किसी भी वर्ष आरक्षित स्थानों से कम स्थानों के योग्यता प्राप्त उम्मीदवारों की कठिनाई से पार पाने के लिए सरकार ने संकल्प के पैरा 7( i )( ii ) में यह व्यवस्था की कि रिक्त स्थानों के अवशेष स्थानों को मुसलमानों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
वास्तव में ऐसी कठिनाइयां अनुसूचित जातियों के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती जिन्हें अन्य अल्पसंख्यकों के मामले में सफलतापूर्वक दूर किया जा सका है। यदि सरकार ऐसा करती है तो वह अनुसूचित जातियों के न्यायपूर्ण दावों को अन्याय से ध्वस्त करने की दोषी होगी। सरकार को ऐसे आधार प्रयोग करने के लिए दोषी ठहराया जाएगा जो केवल कारण ही नहीं है अपितु अनुसूचित दावों के विरूद्व उठने वाले बहाने भी है।
दो उपचार प्रस्तावित किए गए हैं, अर्थात् (1)उन्हेंं अल्पसंख्यक घोषित करना, और (2) वार्षिक रिक्त स्थानों में उनका अनुपात निर्धारित करना। परंतु इसके अलावा यह आवश्यक है कि अनुसूचित जातियों को सेवाओं में उपयुक्त भाग आरक्षित कराने के लिए अन्य उपचारों की भी स्वीकृति दी जाए। ये उपचार इस प्रकार हैं-
( i ) आयु-सीमा का बढ़ाया जाना_
( ii ) परीक्षा-शुल्क में कमी_ और
( iii ) अनुसूचित जाति के अधिकारी की नियुक्ति जो यह देखे कि इस
मामले में अनुसूचित जाति के हितों के लिए बनाए गए उपबंध सभी
संबंधित विभागों द्वारा कार्यान्वित किए जाएं।
( i ) आयु-सीमा का बढ़या जाना_
- आई.सी.एस. और केन्द्रीय सेवाओं के वर्तमान नियमों के अंतर्गत अधिकतम आयु-सीमा 24 वर्ष की है। सामान्यतया, यह अधिकतम आयु-सीमा अनुसूचित जातियों