24 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
पर विपरीत प्रभाव डालती है। उनकी अत्यधिक दरिद्रता के कारण अनुसूचित जाति के लड़के के लिए यह संभव नहीं है कि वह शिक्षा के उस स्तर तक पहुंच जाए कि वह उच्च और सम्पन्न वर्गों के विद्यार्थियों के साथ इसी आयु-सीमा में प्रतियोगिता कर सके। अनुसूचित जाति के बच्चों के विद्यार्थी जीवन में कई बार व्यवधान आ जाते हैं और उन्हें घर पर ट्यूशन अथवा अध्ययन के लिए सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। अन्य वर्ग के विद्यार्थियों की तीव्रता और अनवरत रूप से प्रगति करने के लिए सभी सुविधाएं सुलभ हैं। इसके फलस्वरूप, अनुसूचित जातियों के बच्चे अपनी शिक्षा के अंतिम चरण तक पहुंचते समय प्रतियोगिता की स्थिति में नहीं रह पाते क्योंकि वे लोक सेवा की भर्ती के लिए आयु के कारण पात्र नहीं बन पाते। इसलिए यह आवश्यक है कि उनकी आयु-सीमा कम से कम तीन वर्ष बढ़ा दी जाय। यह मांग बिल्कुल अनुचित नहीं है और न ही यह कोई असाधारण बात होगी, यदि भारत सरकार इसे स्वीकार कर ले। लगभग सभी प्रांतीय सरकारों ने इस सेवा के अनुपात को आरक्षित किया है और उन्होंने अनुसूचित जातियों का कुछ रियायतें दी हैं तथा उनकी आयु-सीमा को भी अन्य वर्गों की अपेक्षा बढ़ाया गया है। कुछ प्रांतों में यह अंतर दो वर्ष का है और अन्य प्रांतों में यह तीन वर्ष का। यदि भारत सरकार यह रियायत दे दे तो यह एक सुस्थापित सिद्धांत के अनुरूप ही होगा।
( ii ) परीक्षा-शुल्क में कमी
- आई.सी.एस. परीक्षा-शुल्क 100 रु. है, भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा-सेवा का शुल्क 82 रु. 50 पैसे है तथा अन्य लिपिक वर्गीय सेवाओं (सहायक ग्रेड) का परीक्षा-शुल्क 30 रूपए है। यह शुल्क अनुसूचित जातियों के लिए ज्यादा है। वे वास्तव में और सही अर्थों में बड़ी अभावपूर्ण स्थिति में रहते हैं। अनेक अनुसूचित जाति विद्यार्थी अपना समय और शक्ति लगाकर किसी परीक्षा के लिए उम्मीदवार बन पाते हैं तो उनके लिए इन परीक्षाओं में बैठना-कठिन हो जाता है क्योंकि परीक्षा के शुल्क उनके माता-पिता की आय से परे होते हैं। इस कठिन परिस्थिति को दूर करने की आवश्यकता है। यह आग्रह है कि अनुसूचित जातियों के उम्मीदवारों से इन परीक्षाओं के देय-शुल्क के चौथाई भाग से अधिक शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।
( iii ) अनुसूचित जाति का अधिकारी
- यदि इन दो रियायतों की अनुमति दी जाए तो इससे अनुसूचित जातियों को अधिक आसन शर्तों पर प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा। परंतु इन उपायों से दी जाने वाली सहायता पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा भी कुछ करना चाहिए। भारत सरकार में अनुसूचित जाति के अधिकारी की नियुक्ति गृह विभाग अथवा श्रम विभाग में की जानी चाहिए और उस अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह लोक सेवाओं