राजनीतिक शिकायतें
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में अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के प्रवेश के मामले में उनकी इन सेवाओं में भर्ती के दावे को प्रभावी बनाए। यह कहा जाता है कि कभी भारत सरकार ने ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति की थी ताकि सेवाओं में समुदायवार प्रतिनिधित्व सुरक्षित किया जा सके। परंतु यदि यह बात सही नहीं भी है तो भी अनुसूचित जातियों के सेवा के दावों की सुरक्षा के लिए अनुसूचित जाति के अधिकारी की नियुक्ति का मामला आवश्यक और तात्कालिक तथा विवादहीन है। इस बात की काफी आशंका है कि यदि इन नियमों को लागू करने के लिए अनुसूचित जाति के अधिकारी को न लगाया गया तो, अनुसूचित जातियों के प्रति चल रही भेदभाव वाली मनोवृत्ति के कारण, उन्हें इस प्रकार लागू किया जाएगा कि वे बेमानी बन जाएंगे। इसका केवल यही उपचार है कि एक स्वतंत्र अधिकारी की नियुक्ति की जाए और उसे वह कर्त्तव्य को निभाने के लिए कहा जाए जो उन नियमों को कार्यान्वित करने के लिए उसे सौंपा गया है।
4. संघ लोक सेवा आयोग में प्रतिनिधित्व का अभाव
- इस समय संघ लोक आयोग में चार सदस्य हैं। इनमें से दो सदस्य यूरोपीय हैं, एक सदस्य हिन्दू है तथा एक सदस्य मुसलमान है। अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधि को संघ लोक सेवा आयोग के गठन में सम्मिलित नहीं किया गया है। ऐसा कोई आधार दिखाई नहीं देता जिसके अनुसार अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व को संघ लोक सेवा आयोग में न रख जाए। भारत में प्रमुखतः तीन वर्ग के लोग हैं। इनमें से अनुसूचित जाति के लोग तीसरे वर्ग में आते हैं। इस वर्ग की जनसंख्या लाखों में है। इनकी सेवा के प्रश्न का उतना ही महत्व है जितना अन्य दो जनसंख्या के वर्गों का। उनके हितों को अन्य दो वर्गो के हितों से वास्तव में कम खतरा नहीं है। उनको इस
खतरे से बचाने की आवश्यकता अन्य दो वर्गों से कहीं अधिक है। यदि किसी भी कसौटी से देखा जाए तो अन्य दो वर्गो के समान अनुसूचित जातियों को भी संघ लोक सेवा आयोग में प्रतिनिधित्व देने से इनकार नहीं किया जाना चाहिए। संघ लोक सेवा आयोग का गठन निश्चय ही सांप्रदायिक प्रवृत्ति का है। ऐसा करने के केवल दो कारण हो सकते हैं। प्रथम यह कि आयोग में अधिक जनसंख्या वाले वर्गो के लोगों का प्रतिनिधित्व वांछनीय है। दूसरा यह कि आयोग के सामुदायिक गठन से एक समुदाय की साम्प्रदायिक मनोवृत्ति को दूसरे समुदाय की साम्प्रदायिक मनोवृत्ति से प्रतिसाद किया जा सकता है। कोई भी इसे किसी भी प्रकार से देखें, यह मानना होगा कि संघ लोक सेवा आयोग में अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व को छोड़