1. राजनीतिक शिकायतें - Page 41

26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

देना केवल अन्याय है। अनुसूचित जातियों को लोक सेवा आयोग में कोई विश्वास नहीं हो सकता क्योंकि लोक सेवा आयोग हिंदुओं और मुसलमानों की विचाराधारा से प्रभावित होता है। चाहे ये दोनों जातियां आपस में कितना ही झगड़ा कर लें, फिर भी मिल-बांटकर लाभ उठाने के लिए सरलता से एक हो जाती हैं और अनुसूचित जाति को उसके भाग से अलग करने में नहीं हिचकती। यह सिद्ध करना कठिन है कि आयोग अनुसूचित जातियों के लिए न्याय नहीं कर पाया है, यद्यपि यह सत्य है कि अभी तक अनुसूचित जाति का एक भी उम्मीदवार आयोग द्वारा उपयुक्त घोषित नहीं किया गया है। किसी भी आयोग को इस पक्षपात के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता। प्रत्येक आयोग के लिए यह खुला मार्ग है कि वह ‘‘अनुपयुक्त’’ जैसे शब्द का प्रयोग करके अपने को बचा ले। यह शब्द व्याख्या देने से कहीं अलग अनेक दोषों को अपने में समेट लेता है। न्याय की यह मांग है कि अनुसूचित जातियों को संघ लोक सेवा आयोग में वह प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए जिस पर उनका अधिकार है।