2. शैक्षिक शिकायतें - Page 47

32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

इंस्ट्रक्शन (या उसका डिप्टी डायरेक्टर) अथवा ऐसा कोई अन्य

व्यक्ति जिसे प्रांतीय सरकार इस हेतु नामांकित करे।

  1. बोर्ड के कार्य इस प्रकार हैंः-

(क) किसी भी ऐसे शैक्षिक प्रश्न पर परामर्श देना जो भारत सरकार

अथवा स्थानीय सरकार द्वारा उसको भेजा जाए।

(ख) भारत के लिए विशेष रूप से हितकारी और लाभदायक शैक्षिक

विकास के संबंध में सूचना व सलाह देना_ भारत सरकार और स्थानीय

सरकारों को अपनी सिफारिशों के साथ उस सूचना को परिचालित करना

तथा इससे पूर्व उस सूचना की जांच करना।

  1. बोर्ड के कार्यकलापों से यह स्पष्ट रूप से विदित है कि बोर्ड अनुसूचित जाति की शैक्षिक समस्या का अध्ययन कर सकता है क्योंकि यह स्थिति विशेष हित की है और वह इस संबंध में सिफारिशें कर सकता है तथा इस बारे में केन्द्रीय और प्रांतीय सरकारों को सलाह दे सकता है। अनुसूचित जातियों में उच्च शिक्षा के प्रसार के लिए सरकारों और विश्वविद्यालयों का ध्यान आकर्षित करने का विशेष महत्व है।

  2. फिर भी, सर्वप्रथम यह आवश्यकता है कि बोर्ड को अनुसूचित जातियों जैसे विशेष वर्गो की शैक्षिक समस्या के बारे में रूचि लेनी चाहिए, यह तभी संभव होगा जब बोर्ड में अनुसूचित जाति के सदस्यों को प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसलिए यह सुझाव दिया जाता है कि अनुसूचित जाति के दो प्रतिनिधियों को बोर्ड में नामांकित किया जाए।

2. तकनीकी प्रशिक्षण के लिए सुविधाओं का अभाव
  1. आर्थिक दशा सुधारने की दृष्टि से अनुसूचित जातियों को साहित्यिक शिक्षा की तुलना में तकनीकी शिक्षा देना अधिक महत्वपूर्ण है। परंतु तकनीकी शिक्षा बहुत महंगी है और अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए यह संभव नहीं है कि वे तकनीकी शिक्षा ले सकें। किन्तु तकनीकी शिक्षा के बिना उनकी आर्थिक दशा में सुधार नहीं होगा। हिन्दुओं की सामाजिक पद्धति के कारण, अनुसूचित जातियों का भारतीय अर्थव्यवस्था में बहुत नीचा स्थान है। स्मृद्धि के समय उसे बाद में रोजगार दिया जाता है और मंदी के समय उसे सबसे पहले रोजगार से अलग कर दिया जाता है। अलबता यह उन हिन्दुओं की सामाजिक मानसिकता के कारण है जो अनुसूचित जातियों के विरूद्ध भेदभाव बरतती है। परंतु एक अन्य कठिनाई भी है जो उनके मार्ग को अवरूद्ध करती है और वह यह है कि ये लोग सामान्य तथा अकुशल श्रमिक हैं और उनके पास कोई भी तकनीकी ज्ञान नहीं है।