शैक्षिक शिकायतें
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- मुझे ऐस लगता है कि भारत सरकार उनके भाग्य को सुधारने के लिए बहुत कुछ कर सकती है, यदि उन्हें तकनीकी कौशल उपलब्ध कराया जाए जो उनके पास इस समय नहीं है। भारत सरकार द्वारा नियंत्रित अथवा चलाए जाने वाले उन व्यवसायों में अनुसूचित जाति के लड़कों को प्रशिक्षार्थी के रूप में रखा जा सकता है जहां तकनीकी प्रशिक्षण देने की संभावनाएं विद्यमान हैं।
मैं केवल दो व्यवसायों का संदर्भ देना चाहता हूंः-
(1) सरकारी प्रिंटिंग प्रेसों में प्रशिक्षार्थीः
ऐसे कई प्रिंटिंग प्रेस हैं जो भारत सरकार के अंतर्गत आते हैं। यह कार्य एक दक्षता का कार्य हैं जो उन लोगों को दिया जाता है जिन्हें प्रेस कार्य में प्रशिक्षित किया गया हो- जैसे कम्पोजीटर, प्रिंटर, बांइडर आदि। कोई कारण नहीं कि भारत सरकार ऐसी कोई योजना न बनाए जहां अनुसूचित जातियों के योग्य बच्चे उपरोक्त व्यवसायों में जिनका संबंध प्रिंटिंग ट्रेड से हैं प्रशिक्षार्थी के रूप में काम करें।
(2) रेलवे वर्कशापों में प्रशिक्षार्थी
भारत की रेलें अधिकांशतया भारत सरकार के हाथ में है और भारत सरकार ऐसी वर्कशापें चलाती हैं जहां फिटर, बढ़ई और अन्य तकनीशियन काम पर लगाए जाते हैं, और मुझे मालूम नहीं है कि क्या रेलवे विभाग के पास ऐसे प्रशिक्षार्थियों के लिए जाने की योजनाएं हैं जिन्हें रेलवे में बाद में काम पर लगाने के लिए तकनीशियन के रूप में प्रशिक्षित किया जा सके। परंतु ऐसी कोई योजना अस्तित्व में न हो फिर भी यह आवश्यक है कि अनुसूचित जातियों के लाभ के लिए ऐसी योजना बनाई जाए।
- इसलिए मेरा सुझाव है कि एक प्रशिक्षार्थी योजना हाथ में ली जाए, जिसके माध्यम से अनुसूचित जातियों के अनेक लड़कों को प्रतिवर्ष प्रिंटिंग प्रेस और रेलवे वर्कशाप में प्रशिक्षण के लिए रखा जाए। इस पर ज्यादा व्यय भी नहीं होगा।