अन्य शिकायतें
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करे। यदि उसका टेंडर सबसे कम लागत वाले टेंडर से ऊंचा है तो वह उसे स्वीकार नहीं करेगा, यद्यपि वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है। वह उन दो नियमों में से पहले नियम का पालन करेगा। स्थिति कुछ भी क्यों न हो, उसके पास अनुसूचित जातियों के ठेकेदारों के टेंडर को रद्द करने का औचित्य मौजूद होगा।
- परंतु साम्प्रदायिक पक्षपात के विरूद्ध कोई उपचार नहीं है। मुझे जो बात इस मुद्दे पर समझ आती है वह यह है कि अनुसूचित जाति के ठेकेदार का टेंडर सबसे कम लागत के टेंडर से 5 प्रतिशत तक अधिक हो तो उसे सबसे कम कीमत का माना जाए। अलबत्ता इसमें वित्तीय हानि निहित है और वित्त विभाग को इस पर सहमत होना पड़ेगा। मैं इस प्रकार की रियायत की कोई अनुमानित लागत नहीं बता सकता। मुझे विश्वास है कि यह बहुत अधिक नहीं होगी।