4. पीड़ित लोगों के प्रति सरकार का कर्तव्य - Page 53

38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

अध्याय 4

पीडि़त लोगों के प्रति सरकार का कर्त्तव्य

  1. अनुसूचित जातियों की ओर से इस ज्ञापन में कुछ प्रस्ताव किए गए हैं। इनमें विशेष रूप से ऐसे प्रस्ताव हैं जिनका संबंध राजनीतिक शिकायतों को दूर करना है तथा इनसे सरकारी खजाने पर वित्तीय भार नहीं पड़ता। वे वास्तव में प्रस्ताव कम हैं राजनीतिक मांगे अधिक, जैसा कि उनके संबंध में दिए गए तर्को और न्याय की दृष्टि से प्रतीत होता है तथा सरकार को उन्हें स्वीकार करना चाहिए। कठिनाई उसी समय उठती है जब ऐसे प्रस्ताव स्वीकार किए जाएं जिनमें केन्द्रीय सरकार के राजस्व का वित्तीय भार निहित होता है। इसमें वित्तीय भार निहित तो है, परंतु इन्हें इस आधार पर ही रद्द नहीं किया जा सकता। इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि अनुसूचित जातियों की ओर सरकार का कर्त्तव्य है, और यदि सरकार इस बारे में अपना कर्त्तव्य स्वीकार करती है तो उसे इस कर्त्तव्य को निभाना पड़ेगा, चाहे इसमें सरकारी खजाने पर वित्तीय भार ही क्यों न पड़े।

  2. अनुसूचित जातियों को लेकर ब्रिटिश सरकार की नीति पूर्णतया और लगातार लापरवाही की रही है। ऐसा प्रारंभ से ही हुआ जब ब्रिटिश सरकार ने यह महसूस किया कि उसका कर्त्तव्य केवल कानून और व्यवस्था बनाए रखने का ही नहीं हैं अपितु लोगों को शिक्षित करने तथा उनके कल्याण को भी देखने का है। यह बात वर्ष 1850-51 की बम्बई प्रेसीडेंसी के शिक्षा बोर्ड की रिपोर्ट से प्रस्तुत निम्न उद्धरण से स्पष्ट होगीः-

भारत के उच्च वर्गो की जांच

‘‘पैरा 16-यह तथ्य प्रदर्शित होने पर कि जनसंख्या के एक छोटे भाग को ही भारत में सरकारी शिक्षा के प्रभाव में लाया जा सकता है, और माननीय कोर्ट के इस निर्णय पर कि इस श्रेणी में उच्च वर्गो को शामिल किया जाए, यह पता लगाना आवश्यक है कि ये वर्ग कौन-कौन से हैं।