4. पीड़ित लोगों के प्रति सरकार का कर्तव्य - Page 54

पीडि़त लोगों के प्रति सरकार का कर्त्तव्य

भारत में उच्च वर्ग

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‘‘पैरा 17-ऐसे वर्ग जिन्हें प्रभावशील माना जा सकता है, और जहां तक भारत में उच्च वर्गो का संबंध है, वे इस प्रकार वर्गीकृत किए जा सकते हैंः-

प्रथम-जीमदार और जागीरदार, पूर्व सामन्तवादियों के प्रतिनिधि और देशी शक्तियों के अधीन कार्यरत प्रभावशली अधिकारी तथा वे लोग जिन्हें सैनिक वर्ग का कहा जाता है।

द्वितीय- ऐसे व्यक्ति जिन्होंने व्यापार या वाणिज्य में धन अर्जित कर लिया है अथवा वाणिज्यिक वर्ग के हैं।

तृतीय- सरकार के उच्चस्तरीय पदाधिकारी।

चतुर्थ-ब्राह्रमण और उनके बाद उच्च जातियों के लेखक जो कलम के सहारे जीवनयापन करते हैं और बम्बई में ‘प्रभु’ और ‘सीनवी’ और बंगाल में ‘कायस्थ’ हैं, बशर्ते कि उन्होंने शिक्षा अथवा पद में कोई स्थान प्राप्त कर लिया हो। ब्राह्मण-सबसे अधिक प्रभावशाली

‘‘पैरा 18-इन चार वर्गो में से तुलनात्मक रूप से सबसे अधिक प्रभावशाली, सबसे अधिक जनसंख्या वाले और कुल मिलाकर सरकार जिनसे अपना काम अधिक सरलता से निकलवा सकती है, वे चौथे वर्ग के लोग हैं। भारत भर में यह तथ्य भलीभांति विदित है कि प्राचीन जागीरदार अथवा सैनिक वर्ग हमारे शासन के अंतर्गत प्रतिदिन कमजोर होते जा रहे हैं।

कुछ अपवाद को छोड़कर वाणिज्यिक वर्गो में भी उच्च शिक्षा के प्रभाव के लिए अधिक गुंजाइश नहीं है।

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अंत में, राज्य के कर्मचारी, यद्यपि वे ऐसे काफी लोगों पर अपना प्रभाव रखते हैं जो सरकार के सम्पर्क में आते हैं तथापि उनका प्रभाव उससे भी बड़ी संख्या वाले उन लोगों पर नहीं है जो सरकार से स्वतंत्र हैं।

ब्राह्मणों की गरीबी

‘‘पैरा 19-ऊपर किया गया विश्लेषण चाहे लम्बा प्रतीत होता हो फिर भी यह अपरिहार्य है और इससे कुछ महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकलते हैं। सबसे पहले इससे यह प्रदर्शित होता है कि ऐसे प्रभावशाली वर्ग के अंतर्गत ब्राह्मण तथा उनके समीप की उच्च जातियां आती हैं जिनके बारे में सरकार समझती है कि वह उनमें शिक्षा के बीज बो सकती है।